अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि अमेरिकी सेना ने लगातार तीन रातों तक ईरान के सैन्य ठिकानों पर जोरदार हमले किए। ये कार्रवाई ईरान द्वारा कमर्शियल जहाजों पर किए गए हमलों के जवाब में की गई ताकि दुनिया भर में तेल और ऊर्जा की सप्लाई में कोई रुकावट न आए।

📰: UAE Weather Alert: जुलाई में पड़ेगी भीषण गर्मी, धूल भरी हवाओं और 48 डिग्री तापमान की चेतावनी

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इन हमलों की पुष्टि की है। जानकारी के मुताबिक, 26 जून 2026 को ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में M/V Ever Lovely नाम के जहाज पर ड्रोन हमला किया था, जिसके जवाब में अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की। इसके बाद 28 जून को जब M/T Kiku नाम के पैनमा जहाज पर हमला हुआ, तो अमेरिका ने फिर से मिसाइल और ड्रोन ठिकानों को निशाना बनाया। इससे पहले 5 जून को भी ईरान के रडार साइट्स पर हमले किए गए थे।

किन जगहों को बनाया गया निशाना

अमेरिकी सेना ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज के साथ-साथ तटीय रडार साइट्स को तबाह कर दिया। इनमें मुख्य रूप से Goruk और Qeshm Island के रडार सिस्टम शामिल थे। अमेरिका का कहना है कि यह कदम जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया था।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस जीत का दावा करते हुए कहा कि उन्होंने ईरान के रडार सिस्टम को पूरी तरह खत्म कर दिया है और अब ईरान को सब कुछ नए सिरे से शुरू करना होगा। ट्रंप ने पिछले चार महीनों में ईरान के खिलाफ पूरी सैन्य जीत हासिल करने की बात भी कही।

ईरान की प्रतिक्रिया

दूसरी तरफ, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इन हमलों का कड़ा विरोध किया है। ईरान ने दावा किया कि उसने जवाब में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB ने दक्षिणी ईरान के Sirik इलाके में धमाकों की खबर दी। ईरान की सेना ने यह भी दावा किया कि उन्होंने अमेरिकी डिस्ट्रॉयर्स की ओर चेतावनी वाली मिसाइलें दागीं, हालांकि अमेरिकी सेना ने इस दावे को गलत बताया है।