US Supreme Court का फैसला: फ़िलिस्तीनी संगठनों को देना होगा 655.5 मिलियन डॉलर का मुआवज़ा

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए फ़िलिस्तीनी अथॉरिटी (PA) और फ़िलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइज़ेशन (PLO) की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें उन पर लगाए गए भारी-भरकम मुआवज़े पर रोक लगाने की मांग की गई थी। अब इन संगठनों को 655.5 मिलियन डॉलर यानी लगभग 6,244.77 करोड़ रुपये का मुआवज़ा उन अमेरिकी परिवारों को देना होगा, जिनके परिजन 2000 के दशक की शुरुआत में इज़राइल में हुए आतंकवादी हमलों में मारे गए या घायल हुए थे। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सोनिया सोटोमायोर ने सोमवार को इस अपील को बिना कोई टिप्पणी किए ठुकरा दिया, जिसके चलते निचली अदालत का आदेश अब पूरी तरह से लागू हो गया है।
मुआवज़े का आधार और कानूनी लड़ाई
यह पूरा कानूनी मामला उन छह आतंकवादी हमलों से जुड़ा है, जो साल 2002 से 2004 के बीच 'सेकंड इंतिफ़ादा' के दौरान हुए थे। प्रभावित परिवारों ने इसके लिए फ़िलिस्तीनी प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए अदालत में मुकदमा दायर किया था। हालांकि, साल 2016 में एक संघीय अपील अदालत ने अधिकार क्षेत्र का हवाला देते हुए पहले के फैसले को पलट दिया था, लेकिन बाद में अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पारित नए कानून ने इस मामले को फिर से जीवित कर दिया। इस कानून ने उन अमेरिकी नागरिकों को विदेशों में हुए हमलों के लिए मुकदमा करने का हक दिया, जो पहले कानूनन संभव नहीं था। पिछले साल ही सुप्रीम कोर्ट ने इस नए कानून की संवैधानिक वैधता को भी बरकरार रखा था।
फ़िलिस्तीनी प्रशासन की आर्थिक स्थिति पर संकट
इस फैसले के बाद फ़िलिस्तीनी संगठनों ने अपनी दलील दी थी कि इतनी बड़ी रकम का भुगतान करना उनकी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से तबाह कर सकता है। उन्होंने अदालत को बताया कि इस भुगतान से बेरोज़गारी बढ़ेगी और स्वास्थ्य, शिक्षा तथा न्याय व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाएं ठप पड़ सकती हैं। इससे वेस्ट बैंक में हिंसा और अस्थिरता का खतरा और अधिक बढ़ सकता है। फ़िलिस्तीनी अथॉरिटी पहले से ही गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रही है क्योंकि इज़राइल उनके द्वारा एकत्र किए गए टैक्स राजस्व का एक बड़ा हिस्सा रोककर बैठा है। इज़राइल का कहना है कि यह पैसा आतंकवाद को बढ़ावा देने में इस्तेमाल होता है, जबकि फ़िलिस्तीनी इसे वित्तीय घेराबंदी मानते हैं।
भविष्य पर विशेषज्ञों की राय
इस मामले पर रशिया टुडे (RT) की रिपोर्ट के अनुसार, अब मुआवज़े की राशि वसूलने को लेकर कानूनी और राजनीतिक विवाद और गहरा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पूरी राशि की वसूली की जाती है, तो वेस्ट बैंक की पहले से ही कमजोर हो चुकी अर्थव्यवस्था पर गहरा नकारात्मक असर पड़ेगा। फिलहाल, दोनों पक्षों के बीच इस बड़ी रकम के भुगतान को लेकर कानूनी खींचतान बनी रहने के आसार हैं। इस मामले में विस्तृत जानकारी के लिए आप हिन्दुस्थान समाचार के आधिकारिक पोर्टल पर भी नजर रख सकते हैं।