अमेरिकी सरकार के नए फैसलों से आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च बढ़ सकता है। US-India Strategic Partnership Forum (USISPF) के प्रेसिडेंट और सीईओ Mukesh Aghi ने चेतावनी दी है कि भारत से आने वाली जेनेरिक दवाओं पर प्रस्तावित टैरिफ से अमेरिका में आम लोगों के लिए इलाज महंगा हो जाएगा। राष्ट्रपति Donald Trump ने 21 जुलाई 2026 को दवाओं के उत्पादन को अमेरिका में लाने के लिए एक चरणबद्ध टैरिफ योजना की घोषणा की है, जबकि भारत वर्तमान में अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली 38% से 50% जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति करता है।

क्या है नया टैरिफ प्लान और इसके मायने

नई नीति के तहत 1 अगस्त 2026 से अगले दो साल तक जेनेरिक दवाओं पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा। हालांकि इसके बाद नियम सख्त हो जाएंगे। अगस्त 2028 से एक साल के लिए टैरिफ को 100% तक बढ़ाया जाएगा और अगस्त 2029 से इसे 200% कर दिया जाएगा। जो कंपनियां इस दो साल की अवधि के भीतर अमेरिका में अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट नहीं लगा पाएंगी, उन्हें ये भारी शुल्क देना होगा। यह कदम Trade Expansion Act of 1962 की धारा 232 के तहत उठाया जा रहा है।

आम मरीजों और बाजार पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि जेनेरिक दवाओं पर मार्जिन बहुत कम होता है, इसलिए इसका बोझ सीधे अमेरिकी मरीजों पर पड़ेगा। Indian Pharmaceutical Alliance (IPA) प्रशासन के साथ बातचीत कर रही है, लेकिन जानकारों का कहना है कि दो साल का समय सप्लाई चेन को शिफ्ट करने के लिए बहुत कम है। इस घोषणा के बाद 24 जुलाई 2026 को भारतीय फार्मा कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। पेशेंट एडवोकेसी ग्रुप्स ने भी चिंता जताई है कि यह कदम दवाओं की किफायती पहुंच को बाधित कर सकता है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.