अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी सेना ने ईरानी जहाज़ M/V Touska के 22 चालक दल के सदस्यों को रिहा कर पाकिस्तान भेज दिया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है कि इन लोगों को उनके देश वापस भेजने की तैयारी की जा रही है।

M/V Touska जहाज़ को अमेरिका ने क्यों पकड़ा था

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने बताया कि इस जहाज़ को 19 अप्रैल 2026 को ओमान की खाड़ी में चबहार पोर्ट के पास पकड़ा गया था। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी की हुई है और इस जहाज़ ने उन नियमों का पालन नहीं किया था। अमेरिकी सेना का कहना है कि चालक दल को 6 घंटे तक बार-बार चेतावनी दी गई लेकिन उन्होंने बात नहीं मानी, जिसके बाद जहाज़ को ज़ब्त कर लिया गया।

पाकिस्तान की भूमिका और रिहाई की पूरी जानकारी

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस रिहाई को अमेरिका की तरफ से एक विश्वास बढ़ाने वाला कदम बताया है। पूरी प्रक्रिया की जानकारी नीचे दी गई है:

  • रिहाई की तारीख: चालक दल के 22 सदस्य 3 मई की रात को पाकिस्तान पहुँचे और 4 मई को उन्हें ईरानी अधिकारियों को सौंप दिया गया।
  • अन्य यात्री: 6 अन्य यात्री, जो चालक दल के परिवार के सदस्य थे, उन्हें पिछले हफ्ते ही दूसरे देश भेज दिया गया था।
  • जहाज़ की वापसी: खबर है कि ज़रूरी मरम्मत के बाद जहाज़ को पाकिस्तानी समुद्री क्षेत्र में लाया जाएगा और फिर उसके असली मालिक को लौटा दिया जाएगा।

ईरान की प्रतिक्रिया और मौजूदा हालात

ईरान ने अमेरिका की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। ईरान की सेना ने अमेरिका पर समुद्री डकैती का आरोप लगाया था। इसी बीच ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने बताया कि पाकिस्तान के ज़रिए अमेरिका ने एक प्रस्ताव भेजा है, जिस पर ईरानी अधिकारी विचार कर रहे हैं ताकि युद्ध को खत्म किया जा सके। बता दें कि 13 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद में शांति वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू की थी।

Frequently Asked Questions (FAQs)

M/V Touska जहाज़ को कब और कहाँ पकड़ा गया था

इस जहाज़ को 19 अप्रैल 2026 को ओमान की खाड़ी में ईरान के चबहार पोर्ट के पास अमेरिकी सेना ने पकड़ा था।

इस मामले में पाकिस्तान ने क्या मदद की

पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई और चालक दल के सदस्यों की रिहाई और जहाज़ की वापसी की प्रक्रिया को आसान बनाया।