अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी आर्थिक कार्रवाई को और कड़ा कर दिया है. अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और वहां की सरकार के फंड्स को फ्रीज करने की मांग की है. इस कदम का मकसद ईरान पर दबाव बढ़ाना है ताकि मौजूदा तनाव और युद्ध का अंत हो सके.
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ईरान पर लगाए गए नए प्रतिबंध और आर्थिक दबाव क्या हैं?
अमेरिका ने एक ऐसा प्लान तैयार किया है जिससे ईरान को हर दिन करीब 500 मिलियन डॉलर का भारी नुकसान होगा. इसके लिए उन फाइनेंशियल संस्थानों पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं जो तेहरान की मदद करते हैं. इसके अलावा, अमेरिका ने उन सभी देशों को चेतावनी दे दी है जो ईरान से तेल खरीदते हैं कि उन पर सेकेंडरी सैंक्शन लगाए जा सकते हैं.
समुद्री नाकाबंदी और तेल की कीमतों पर क्या असर होगा?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने जानकारी दी है कि ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी अब पूरी तरह लागू हो गई है. इस ऑपरेशन में 12 से ज्यादा वॉरशिप और 10 हजार से ज्यादा नाविक तैनात किए गए हैं. इनका काम ईरान के बंदरगाहों से किसी भी कमर्शियल जहाज या ऑयल टैंकर को आने-जाने से रोकना है.
Scott Bessent का मानना है कि जैसे ही Strait of Hormuz खुलेगा, एक हफ्ते के अंदर ग्लोबल ऑयल सप्लाई फिर से नॉर्मल हो जाएगी. इससे अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें गिरकर 3 डॉलर तक आ सकती हैं, जिसका फायदा आम ग्राहकों को मिलेगा.
बातचीत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या अपडेट है?
वाइट हाउस ने साफ किया है कि उन्होंने युद्धविराम की समय सीमा बढ़ाने की मांग नहीं की है, लेकिन बातचीत काफी सकारात्मक दिशा में चल रही है. उम्मीद है कि आने वाली मीटिंग पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होगी, जो इस समय एकमात्र मध्यस्थ है.
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| वित्तीय कार्रवाई | ईरान और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के फंड फ्रीज करने की मांग |
| दैनिक नुकसान | करीब 500 मिलियन डॉलर प्रतिदिन |
| नौसेना तैनाती | 12+ वॉरशिप और 10,000 नाविक |
| यूरोपीय संघ का कदम | 20 फरवरी 2026 को IRGC को आतंकी संगठन घोषित किया |
| संभावित बातचीत स्थल | इस्लामाबाद, पाकिस्तान |
| तेल का अनुमान | Strait of Hormuz खुलने के एक हफ्ते बाद सप्लाई नॉर्मल होगी |
