अमेरिका के ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने एक बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने साफ़ कर दिया है कि रूसी और ईरानी तेल की खरीद के लिए दी गई अस्थायी छूट को अब आगे नहीं बढ़ाया जाएगा. इस फैसले का असर आने वाले समय में वैश्विक तेल बाजार और भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है, क्योंकि रूस से तेल खरीदने वाले देशों के लिए अब मुश्किलें बढ़ेंगी.

रूसी तेल पर छूट कब तक है और क्या होगा असर?

रूसी तेल और गैस की खरीद के लिए दी गई छूट 16 मई को खत्म हो जाएगी. इससे पहले मार्च 2026 में जब तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई थीं, तब बाजार को स्थिर करने के लिए अमेरिका ने यह छूट दी थी. हालांकि 18 अप्रैल को कुछ गरीब देशों की मदद के लिए इसे बढ़ाया गया था, लेकिन अब इसे रिन्यू नहीं किया जाएगा. अमेरिकी सीनेटर Chris Coons ने बताया कि इस छूट की वजह से रूस को हर दिन लगभग 150 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त कमाई हो रही थी.

ईरानी तेल और Strait of Hormuz का क्या मामला है?

Scott Bessent ने स्पष्ट किया है कि ईरानी तेल के लिए एक बार दी गई छूट को दोबारा देना अब मुमकिन नहीं है. अमेरिका और इसराइल के हमलों के बाद ईरान ने Strait of Hormuz के रास्ते होने वाली दुनिया की 20 प्रतिशत तेल सप्लाई को ब्लॉक कर दिया है. अमेरिका का कहना है कि वहां ब्लॉकेड होने की वजह से अब ईरान को अगले दो से तीन दिनों में अपना तेल उत्पादन बंद करना पड़ सकता है, जिससे उनके कुओं को काफी नुकसान होगा.

भारत और कुवैत पर इस फैसले का क्या असर होगा?

भारत रूसी तेल का एक बड़ा खरीदार है, इसलिए इस फैसले से भारत की तेल खरीद और कीमतों पर असर पड़ने की संभावना है. वहीं कुवैत में Strait of Hormuz की वजह से तेल शिपमेंट में बड़ी रुकावटें आई हैं, जिस वजह से वहां कुछ शिपमेंट्स पर ‘force majeure’ घोषित किया गया. तनाव इतना बढ़ गया है कि 1 मार्च को कुवैत के Port Shuaiba में एक ईरानी ड्रोन हमले में 6 अमेरिकी सैनिकों की जान चली गई थी.

मुख्य बिंदु विवरण
रूसी तेल छूट की अंतिम तारीख 16 मई 2026
रूस की अतिरिक्त कमाई 150 मिलियन डॉलर प्रतिदिन
ब्लॉक हुई ग्लोबल ऑयल सप्लाई 20 प्रतिशत (Strait of Hormuz)
घोषणा की तारीख 24 अप्रैल 2026