अमेरिका के खजाने विभाग (US Treasury) ने ईरान के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज़ कर दी है। ईरान से जुड़े कई लोगों और कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाए गए हैं। इसका मुख्य मकसद ईरान के पैसों के लेन-देन के रास्तों को बंद करना है ताकि उसकी सैन्य ताकत और हथियारों के नेटवर्क को कमजोर किया जा सके।

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ईरान के करेंसी एक्सचेंज हाउसों पर क्या एक्शन लिया गया?

1 मई 2026 को US Treasury के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने ईरान के तीन विदेशी मुद्रा विनिमय केंद्रों और उनसे जुड़ी मुखौटा कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया। इस अभियान को Economic Fury नाम दिया गया है। ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने साफ कहा कि सरकार ईरान की सेना को मिलने वाली आर्थिक मदद के रास्तों को पूरी तरह बंद कर रही है। ये एक्सचेंज हाउस सालाना अरबों डॉलर के लेन-देन में मदद करते थे, जिससे तेल की कमाई को सैन्य खर्च के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

हथियारों की तस्करी रोकने के लिए किन देशों पर असर पड़ेगा?

इससे पहले 21 अप्रैल 2026 को अमेरिका ने 14 व्यक्तियों, संस्थाओं और हवाई जहाजों पर प्रतिबंध लगाए थे। ये सभी ईरान, तुर्की और UAE में सक्रिय थे और ईरान के लिए मिसाइल और ड्रोन के पुर्जे जुटाने का काम कर रहे थे। अमेरिका का कहना है कि ईरान को वैश्विक ऊर्जा बाजारों में गड़बड़ी करने और नागरिकों पर मिसाइल हमले करने के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा।

चीन की कंपनी और अन्य नियमों का क्या अपडेट है?

1 मई 2026 को अमेरिका के विदेश विभाग ने चीन की कंपनी Qingdao Haiye Oil Terminal Co., Ltd. पर भी प्रतिबंध लगाया। इस कंपनी पर ईरान के लाखों बैरल प्रतिबंधित कच्चे तेल का आयात करने का आरोप है। इसके अलावा 7 मई 2026 को अमेरिकी सरकार ने फेडरल रजिस्टर में जानकारी दी कि पुराने जनरल लाइसेंस (S और T) अब खत्म हो चुके हैं, जो पहले कुछ खास लेन-देन की अनुमति देते थे।

Frequently Asked Questions (FAQs)

अमेरिका ने ईरान पर ये नए प्रतिबंध क्यों लगाए?

अमेरिका ने ईरान की सेना के वित्तीय स्रोतों को काटने और मिसाइल व ड्रोन जैसे खतरनाक हथियारों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी को रोकने के लिए ये कदम उठाए हैं।

Economic Fury अभियान का क्या मतलब है?

यह US Treasury की एक मुहिम है जिसके तहत ईरान के उन करेंसी एक्सचेंज हाउसों को निशाना बनाया गया है जो तेल की कमाई को सैन्य उपयोग के लिए विदेशी मुद्रा में बदलते थे।