अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी आर्थिक जंग को और तेज़ कर दिया है। US Treasury ने साफ चेतावनी दी है कि जो भी वित्तीय संस्थान ईरान की मदद करेंगे, उन पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे। इसके साथ ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की पूरी तरह नाकेबंदी करने का ऐलान किया है, जिससे वैश्विक व्यापार पर असर पड़ सकता है।

बैंकों और तेल व्यापार पर क्या असर होगा?

US Treasury सचिव Scott Bessent ने कहा कि विभाग विदेशी संस्थानों पर सेकेंडरी सैंक्शंस लगाने के लिए पूरी तरह तैयार है। ईरान के तेल पर दी गई 30 दिनों की छूट इस हफ्ते खत्म हो जाएगी। इसके अलावा, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में नाकेबंदी के कारण चीन के टैंकरों को ईरान के बंदरगाहों तक जाने या वहां से निकलने की अनुमति नहीं मिलेगी, जिससे तेल की सप्लाई प्रभावित होगी।

हथियारों की सप्लाई और नए डिजिटल नियमों का क्या है मामला?

राष्ट्रपति ट्रंप ने उन देशों पर 50% टैरिफ लगाने की धमकी दी है जो ईरान को सैन्य हथियार सप्लाई करते हैं। यह चेतावनी मुख्य रूप से चीन को दी गई है। दूसरी ओर, अमेरिकी Treasury के FinCEN और OFAC ने स्टेबलकॉइन (stablecoin) जारी करने वाली कंपनियों के लिए नए नियम प्रस्तावित किए हैं। इन नियमों का मकसद मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद की फंडिंग को रोकना है।

बातचीत और जमी हुई रकम को लेकर क्या अपडेट है?

ईरान की ओर से दावा किया गया कि अमेरिका कतर और अन्य विदेशी बैंकों में उनकी जमी हुई रकम को खोलने के लिए मान गया है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने इस दावे को गलत बताया है। इस तनाव के बीच कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं और पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच दूसरी दौर की बातचीत की मेजबानी करने का प्रस्ताव दिया है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.