अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने ऐलान किया है कि गल्फ क्षेत्र में व्यापार फिर से शुरू होने के साथ ही दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतें कम होंगी। उन्होंने कहा कि संघर्षों के स्थिर होने से सप्लाई मजबूत होगी और महंगाई में गिरावट आएगी। अमेरिकी सरकार ने खाड़ी देशों से गुजरने वाले तेल के जहाजों की सुरक्षा और उनके बीमा को लेकर नए नियमों की घोषणा की है। इस कदम से तेल बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद है।

क्या हैं तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के नए नियम?

अमेरिकी सरकार तेल की कीमतों को कम करने और सप्लाई चेन को बेहतर बनाने के लिए कई बड़े कदम उठा रही है। Scott Bessent के अनुसार, तेल का बाजार फिलहाल पर्याप्त सप्लाई के साथ मजबूत स्थिति में है। इसके लिए कुछ खास घोषणाएं की गई हैं:

  • इंश्योरेंस की सुविधा: अमेरिकी सरकार उन जहाजों और कार्गो शिप को बीमा दे रही है जिनका इंश्योरेंस Lloyds of London ने रद्द कर दिया था।
  • ईरानी तेल का इस्तेमाल: समुद्र में फंसे हुए ईरानी तेल को बेचने की अनुमति दी गई है ताकि ग्लोबल मार्केट में सप्लाई बढ़ाई जा सके।
  • उत्पादन में बढ़ोतरी: रिकॉर्ड अमेरिकी तेल और गैस उत्पादन की वजह से ईंधन की लागत को कम करने में मदद मिली है।
  • रिजर्व का इस्तेमाल: कीमतों को और कम करने के लिए अमेरिका अपने रिजर्व भंडार से अतिरिक्त तेल निकालने पर भी विचार कर रहा है।

गल्फ और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को कैसे मिलेगी सुरक्षा?

खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए सैन्य और आर्थिक दोनों स्तरों पर तैयारी की गई है। सरकार का मानना है कि व्यापारिक गतिविधियों के बढ़ने से आम जनता को राहत मिलेगी। सुरक्षा के लिए निम्नलिखित इंतजाम किए गए हैं:

संस्था का नाम सुरक्षा के उपाय
US Navy जरूरत पड़ने पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले टैंकरों को सुरक्षा प्रदान करना।
Development Finance Corporation (DFC) मिडल ईस्ट गल्फ में ऊर्जा ले जाने वाले जहाजों को राजनीतिक जोखिम बीमा देना।
US Government मर्चेंट मरीन एक्ट 1936 के तहत समुद्री व्यापार में युद्ध जोखिम बीमा और सुरक्षा कवर सुनिश्चित करना।

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव ने पुष्टि की है कि खाड़ी क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि Strait of Hormuz पूरी तरह सुरक्षित होने से पहले ही जहाजों की आवाजाही में बड़ी बढ़ोतरी देखी जाएगी। अमेरिका इस दिशा में दुनिया के बड़े तेल उत्पादकों और रिफाइनरों के साथ मिलकर काम कर रहा है।