अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है कि वह हिजबुल्लाह जैसे मिलिशिया ग्रुप्स पर नियंत्रण रखे। स्विट्ज़रलैंड के बर्गेनस्टॉक में हुई हाई-लेवल मीटिंग के बाद यह बात सामने आई है। इस बैठक में मिडिल ईस्ट में शांति लाने और युद्ध खत्म करने के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
कतर और पाकिस्तान की मदद से हुई इन बातचीत में एक रोडमैप तैयार किया गया है। इसके तहत अगले 60 दिनों के भीतर एक अंतिम समझौते तक पहुँचने की कोशिश होगी। उपराष्ट्रपति Vance ने कहा कि इन बातचीत से एक सफल डील की अच्छी बुनियाद पड़ी है और अमेरिका पूरे क्षेत्र में युद्धविराम चाहता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि परमाणु मुद्दे और लेबनान में युद्धविराम पर जल्द प्रगति होगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया पर सख्त लहजे में कहा कि ईरान को लेबनान में अपने प्रॉक्सी ग्रुप्स को तुरंत रोकना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो अमेरिका ईरान पर फिर से बहुत जोरदार हमला करेगा।
बातचीत के दौरान कुछ अहम फैसलों पर सहमति बनी है:
- ईरान ने अपने देश में इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को वापस बुलाने पर सहमति जताई है।
- अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल्स पर लगे प्रतिबंधों में 60 दिनों की छूट देने की तैयारी कर रहा है जिससे ईरान अपना तेल बेच सकेगा।
- लेबनान सरकार के साथ मिलकर एक ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ बनाया जाएगा ताकि सैन्य ऑपरेशन रोके जा सकें।
दूसरी ओर, लेबनान में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है। 21 जून को इसराइल और हिजबुल्लाह के बीच झड़पें हुई थीं। इस तनाव के चलते ईरान ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने का ऐलान किया, हालांकि अमेरिका ने कहा कि जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है। ईरान ने मांग की है कि अमेरिका इसराइल को लेबनान से अपनी सेना हटाने के लिए मजबूर करे।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बातचीत में प्रगति की बात स्वीकार की है, जबकि हिजबुल्लाह और इसराइल दोनों ने एक दूसरे पर युद्धविराम तोड़ने का आरोप लगाया है।
