अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए एक बहुत बड़ी कोशिश शुरू हुई है। US उपराष्ट्रपति JD Vance आज इस्लामाबाद पहुंचे, जहाँ वे ईरानी अधिकारियों के साथ शांति वार्ता करेंगे। पाकिस्तान इस पूरी प्रक्रिया में बिचौलिए की भूमिका निभा रहा है। यह बैठक साल 1979 की क्रांति के बाद पहली बार इतने उच्च स्तर पर हो रही है।

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बातचीत का तरीका और मुख्य शर्तें क्या हैं?

यह बातचीत ‘प्रॉक्सिमिटी टॉक्स’ के जरिए होगी, जिसमें अमेरिका और ईरान की टीमें अलग-अलग कमरों में बैठेंगी और पाकिस्तानी अधिकारी उनके बीच संदेश पहुँचाएंगे। ईरान ने साफ कहा है कि बातचीत शुरू होने से पहले लेबनान में युद्ध रुकना चाहिए और उनकी जमा संपत्ति वापस मिलनी चाहिए। वहीं अमेरिका की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि ईरान किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार न बना सके।

इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग में कौन-कौन शामिल है?

इस वार्ता में अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान के बड़े अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। पूरी लिस्ट नीचे टेबल में दी गई है:

देश मुख्य प्रतिनिधि और अधिकारी
अमेरिका उपराष्ट्रपति JD Vance, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, स्टीव विटकॉफ़, जेरेड कुशनर
ईरान संसदीय स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ, विदेश मंत्री अब्बास अराघची, अली अकबर अहमदियन, अब्दोलनासेर हम्माती
पाकिस्तान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, विदेश मंत्री इशाक डार, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, सरदार अयाज सादिक, मोहसिन नकवी

मौजूदा हालात और संभावित खतरे क्या हैं?

इस्लामाबाद में सुरक्षा के बहुत कड़े इंतजाम किए गए हैं और शहर में हजारों सैनिक तैनात हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर बातचीत सफल नहीं हुई, तो अमेरिका फिर से हमले कर सकता है क्योंकि उनके युद्धपोत हथियारों से लैस हैं। दूसरी तरफ, ईरान में पिछले 1,000 घंटों से इंटरनेट बंद है और खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक चीन ईरान को एयर डिफेंस सिस्टम भेजने की तैयारी कर रहा है।