अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने इसराइल सरकार के कुछ सदस्यों को जमकर खरी-खोटी सुनाई है. मामला राष्ट्रपति Donald Trump की ईरान डील से जुड़ा है, जिस पर इसराइल के कुछ नेता नाराजगी जता रहे थे. Vance ने साफ शब्दों में कहा कि इसराइल को अपने सबसे मजबूत सहयोगी अमेरिका के खिलाफ नहीं बोलना चाहिए.
ईरान डील पर अमेरिका की चेतावनी
18 जून 2026 को एक व्हाइट हाउस ब्रीफिंग और New York Times को दिए इंटरव्यू में Vance ने इसराइल के रिएक्शन को ‘अजीब घबराहट’ बताया. उन्होंने कहा कि यह सब अमेरिका के प्रति अविश्वास की वजह से हो रहा है. Vance ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि अगर वह इसराइल सरकार में होते, तो दुनिया के इकलौते शक्तिशाली साथी पर हमला नहीं करते.
हथियारों और पैसों का दिया हवाला
उपराष्ट्रपति ने इसराइल को याद दिलाया कि उसकी सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाले दो-तिहाई हथियार अमेरिकी हाथों ने बनाए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि इन हथियारों का खर्चा अमेरिकी टैक्स देने वाले आम लोगों ने उठाया है.
क्या है यह ईरान डील
इस नई डील के तहत कुछ मुख्य शर्तें तय की गई हैं:
- इसराइल को दक्षिणी लेबनान में मिसाइल हमले रोकने होंगे.
- ईरान की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए उसके कच्चे तेल पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएंगे.
- ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने का वादा किया है.
- ईरान ने यह भी वादा किया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा.
इस डील को लेकर इसराइल के कुछ अधिकारियों ने गहरी चिंता जताई है. कुछ नेताओं ने तो यहाँ तक आरोप लगाया कि Trump के दूतों ने पैसों के लालच में इसराइल के हितों को दांव पर लगा दिया है. हालांकि, प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने सार्वजनिक रूप से कोई आलोचना नहीं की है.
आतंकी संगठनों पर सख्त रुख
JD Vance ने यह भी साफ कर दिया कि अमेरिका ईरान पर से प्रतिबंध तब तक नहीं हटाएगा जब तक वह आतंकी संगठनों, खास तौर पर हिज़्बुल्लाह की फंडिंग करना बंद नहीं करता.