अमेरिका और जर्मनी के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जर्मनी से करीब 5,000 सैनिकों को वापस बुलाने का ऐलान किया है। यह पूरा विवाद ईरान के साथ चल रहे युद्ध और शांति बातचीत को लेकर शुरू हुआ। इस फैसले के बाद जर्मनी के शहर Landstuhl के स्थानीय लोग अपनी अर्थव्यवस्था को लेकर काफी चिंतित हैं।
सैनिकों को हटाने का फैसला क्यों लिया गया?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब जर्मनी के चांसलर Friedrich Merz ने 28 अप्रैल 2026 को कहा कि ईरान शांति बातचीत में अमेरिका को नीचा दिखा रहा है और वॉशिंगटन के पास कोई सही रणनीति नहीं है। इस बयान से नाराज होकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैनिकों की कटौती की चेतावनी दी। अमेरिकी डिफेंस सेक्रेटरी Pete Hegseth ने इस विड्रॉल का आदेश जारी किया। पेंटागन के प्रवक्ता Sean Parnell ने बताया कि यह फैसला यूरोप में सेना की स्थिति की समीक्षा के बाद लिया गया है।
जर्मनी और NATO पर क्या असर पड़ेगा?
जर्मनी के रक्षा मंत्री Boris Pistorius ने इस फैसले को अपेक्षित बताया और कहा कि यूरोपीय देशों को अब अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद लेनी होगी। वहीं, विदेश मंत्री Johann Wadephul ने कहा कि जर्मनी इस कटौती के लिए तैयार है और NATO के साथ चर्चा कर रहा है। NATO भी इस योजना की जानकारी जुटाने में लगा है। यह साफ किया गया है कि यह कदम NATO से अलग होने का नहीं है, क्योंकि 2023 के कानून के अनुसार राष्ट्रपति बिना कांग्रेस की मंजूरी के गठबंधन नहीं छोड़ सकते।
ट्रंप का नया ऐलान और स्थानीय असर
3 मई 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि वह 5,000 से कहीं ज़्यादा सैनिकों को जर्मनी से हटा सकते हैं। इस खबर के बाद मार्केट में यह संभावना कम हो गई है कि अमेरिका 2027 से पहले ईरान पर हमला करेगा। दूसरी ओर, Landstuhl शहर के निवासी डरे हुए हैं क्योंकि वहां अमेरिकी सैन्य सुविधाएं हैं और सैनिकों के जाने से स्थानीय व्यापार को बड़ा नुकसान हो सकता है। इस कटौती के बाद यूरोप में अमेरिकी सैनिकों की संख्या 2022 से पहले के स्तर पर पहुंच जाएगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या अमेरिका NATO गठबंधन से बाहर निकल रहा है?
नहीं, यह केवल जर्मनी से सैनिकों की संख्या कम करने का फैसला है। अमेरिका को NATO से बाहर निकालने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होती है।
Landstuhl शहर के लोग क्यों चिंतित हैं?
Landstuhl में बड़ी अमेरिकी सैन्य सुविधाएं हैं। सैनिकों के वापस जाने से वहां के स्थानीय बाजार और अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ने का डर है।