अमेरिका की सख्त नाकेबंदी के बाद अब ईरान के बंदरगाहों पर संकट गहरा गया है। Chabahar पोर्ट पर जहाज़ों की लंबी कतार लग गई है और व्यापार लगभग ठप हो गया है। इस पूरे मामले से न केवल ईरान बल्कि भारत जैसे देशों की रणनीतिक योजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
USA की नाकेबंदी और जहाज़ों की स्थिति क्या है?
USA ने 13 अप्रैल 2026 को ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों की नाकेबंदी शुरू की थी। CENTCOM के मुताबिक, इस कार्रवाई के बाद Chabahar पोर्ट पर 20 से ज़्यादा जहाज़ फंस गए हैं। सामान्य तौर पर यहाँ केवल 5 जहाज़ होते थे। अब तक 29 जहाज़ों को रोका गया है और 38 व्यापारिक जहाज़ों को अपना रास्ता बदलने या वापस लौटने के लिए कहा गया है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| नाकेबंदी शुरू होने की तारीख | 13 अप्रैल 2026 |
| फंसे हुए जहाज़ों की संख्या | 20 से ज़्यादा |
| रोके गए जहाज़ (CENTCOM) | 29 |
| रास्ता बदलने वाले जहाज़ | 38 |
भारत के लिए यह खबर क्यों ज़रूरी है?
भारत ने Chabahar पोर्ट में काफी निवेश किया है लेकिन अमेरिका ने भारत को दी गई विशेष छूट (sanctions waiver) 26 अप्रैल 2026 को खत्म कर दी है। इस वजह से अब भारत का इस पोर्ट पर काम करना मुश्किल हो गया है। भारत सरकार इस मुद्दे पर अमेरिका और ईरान दोनों के साथ बातचीत कर रही है। Windward जैसी कंपनियों ने बताया कि कई बड़े कंटेनर जहाज़ यहाँ लंगर डाले हुए हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच क्या बयान आए?
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि ईरान की हालत बहुत खराब है और वह चाहता है कि Strait of Hormuz को फिर से खोला जाए। वहीं US ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने साफ किया कि तेल खरीद के लिए कोई छूट नहीं मिलेगी। दूसरी तरफ ईरान ने इस नाकेबंदी को समुद्री डकैती बताया है। ईरान ने प्रस्ताव दिया है कि अगर नाकेबंदी खत्म होती है, तो वह हमलों को रोकने के लिए तैयार है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Strait of Hormuz में ट्रैफिक की क्या स्थिति है?
वर्तमान में यहाँ शिपिंग ट्रैफिक लगभग शून्य हो गया है, जिससे ईरान का तेल उत्पादन रुक सकता है क्योंकि स्टोरेज क्षमता कम हो रही है।
भारत का Chabahar पोर्ट पर क्या असर हुआ?
अमेरिका ने भारत को दी गई सैंक्शन्स छूट 26 अप्रैल 2026 को खत्म कर दी है, जिससे भारत का पोर्ट संचालन अब अनिश्चित हो गया है।