अमेरिका और ईरान ने फ्रांस में एक समझौते (MoU) पर साइन किए हैं। इसके तहत दोनों देशों के बीच 60 दिनों तक बातचीत चलेगी ताकि एक आखिरी समझौते पर पहुंचा जा सके। यह समय 18 जून 2026 से शुरू हो गया है और इसका मुख्य मकसद इलाके में शांति लाना है।

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युद्ध विराम और सैन्य कार्रवाई पर रोक

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि अब सभी मोर्चों पर युद्ध पूरी तरह बंद होना चाहिए। इस समझौते के मुताबिक अब लेबनान समेत सभी जगहों पर सैन्य अभियान तुरंत और हमेशा के लिए रोक दिए जाएंगे। अमेरिका ने इस बात पर जोर दिया है कि शांति के लिए सभी पक्षों को अपनी बात माननी होगी।

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य और तेल निर्यात

अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी हटाने का फैसला किया है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अब बिना किसी टोल के फिर से खोला जाएगा। ईरान ने वादा किया है कि अगले 60 दिनों तक यहाँ से जहाजों का गुजरना मुफ्त रहेगा, लेकिन उसके बाद ईरान यहाँ से ट्रांजिट शुल्क वसूल सकता है। इसके साथ ही, अमेरिका का ट्रेजरी विभाग ईरान के कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात के लिए विशेष छूट जारी कर सकता है।

60 दिनों में किन मुद्दों पर होगी बात

  • ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना।
  • ईरान पर लगे प्रतिबंधों में कितनी छूट दी जाएगी।
  • ईरान को मिलने वाली वित्तीय सहायता का खाका तैयार करना।

ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कन्फर्म किया है कि परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी शर्तें इसी 60 दिनों के भीतर तय कर ली जाएंगी, हालांकि ज़रूरत पड़ने पर इस समय को बढ़ाया भी जा सकता है।

अन्य देशों का क्या है कहना

इस समझौते पर इसराइल ने अपनी आपत्ति जताई है और कहा है कि वह लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाएगा। दूसरी तरफ, सऊदी अरब ने अमेरिका और ईरान के इस फैसले का स्वागत किया है और इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए अच्छा बताया है। इस पूरे समझौते को संभव बनाने में पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता अहम रही।

ईरान के राष्ट्रपति Pezeshkian ने इसे एक ऐतिहासिक दस्तावेज बताया है, जबकि सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei ने समझौते को मंजूरी देते हुए वॉशिंगटन से अत्यधिक मांग न करने की चेतावनी दी है।