अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए बातचीत का दौर शुरू हुआ है। अमेरिकी सरकार ने युद्ध रोकने के लिए ईरान को एक प्रस्ताव भेजा है जिस पर ईरान का विदेश मंत्रालय अभी विचार कर रहा है। इस पूरी बातचीत में पाकिस्तान बीच में रहकर एक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। दुनिया की नजरें अब ईरान के जवाब पर टिकी हैं क्योंकि यह फैसला पूरे क्षेत्र की शांति तय करेगा।
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अमेरिका ने ईरान के सामने क्या शर्तें रखी हैं?
अमेरिका ने युद्ध खत्म करने के लिए एक छोटा सा समझौता पत्र (MOU) तैयार किया है। इसमें कुछ बहुत बड़ी शर्तें रखी गई हैं जिन्हें मानना ईरान के लिए मुश्किल हो सकता है। मुख्य शर्तें इस प्रकार हैं:
- परमाणु हथियार: ईरान को आधिकारिक तौर पर यह मानना होगा कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहता।
- परमाणु केंद्र: ईरान को फوردो, नतांज़ और इस्फ़हान जैसे परमाणु केंद्रों को बंद करना होगा।
- यूरैनियम फ्रीज: यूरैनियम के संवर्धन (Enrichment) को अगले 20 साल तक रोकना होगा।
- यूरैनियम की वापसी: ईरान को लगभग 400 किलोग्राम हाई-एनरिच्ड यूरैनियम अमेरिका को सौंपना होगा।
- समुद्री रास्ता: अमेरिका ईरान के बंदरगाहों से अपनी समुद्री नाकाबंदी हटा लेगा बशर्ते ईरान हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों के आने-जाने पर लगी पाबंदियां हटा ले।
ईरान का क्या रुख है और अब आगे क्या होगा?
ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि वे अभी अमेरिकी प्रस्ताव का अध्ययन कर रहे हैं और कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने बताया कि ईरान अपना जवाब पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुँचाएगा। ईरान ने अपना एक अलग प्रस्ताव भी पाकिस्तान के माध्यम से वाशिंगटन भेजा है।
ईरान में कोई भी बड़ा फैसला सर्वोच्च नेता मोजतबा खामनेई की मंजूरी के बिना नहीं लिया जा सकता। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर जल्द समझौता नहीं हुआ तो वे ईरान पर भारी बमबारी कर सकते हैं। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर गालिबफ ने उन खबरों को गलत बताया है जिनमें कहा गया कि समझौता होने के बहुत करीब है।
युद्ध रोकने में पाकिस्तान और समुद्री स्थिति का क्या असर है?
इस पूरे विवाद को सुलझाने में पाकिस्तान एक पुल का काम कर रहा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय और विदेश मंत्री इस बातचीत को आगे बढ़ाने में जुटे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में अमेरिकी युद्धपोतों की मौजूदगी ने ईरान की मोलभाव करने की ताकत को कम कर दिया है। अमेरिका इस दबाव का इस्तेमाल ईरान से अपनी शर्तें मनवाने के लिए कर रहा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अमेरिका ने ईरान से परमाणु हथियारों के बदले क्या ऑफर किया है?
अमेरिका ने प्रस्ताव दिया है कि अगर ईरान परमाणु केंद्रों को बंद करता है और यूरैनियम सौंपता है, तो वह ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी हटा लेगा।
ईरान और अमेरिका के बीच इस बातचीत में कौन देश मदद कर रहा है?
इस पूरी बातचीत में पाकिस्तान मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभा रहा है और दोनों देशों के प्रस्तावों को एक-दूसरे तक पहुँचा रहा है।