अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहा युद्ध अब खत्म होने जा रहा है। दोनों देशों के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है, जिसके बाद दुनिया के शक्तिशाली देशों ने भी ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के संकेत दिए हैं। इस खबर से पूरी दुनिया और खासकर खाड़ी देशों में शांति की उम्मीद जगी है।
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14 जून 2026 को ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली (E4 देशों) ने एक साझा बयान जारी किया। इन देशों ने कहा कि वे ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम पर कुछ साफ और जांचने योग्य कदम उठाने होंगे। उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरान को किसी भी हाल में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने चाहिए।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया के जरिए इस डील की पुष्टि की। उन्होंने आदेश दिया कि ईरान के बंदरगाहों और Strait of Hormuz पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को तुरंत हटाया जाए। दूसरी तरफ, ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने सरकारी टीवी पर बताया कि इस समझौते के बाद प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाना उनकी प्राथमिकता होगी।
इस समझौते को कराने में पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब और तुर्की ने बड़ी भूमिका निभाई। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने इसमें मुख्य मध्यस्थ के रूप में काम किया। इस पूरे समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में किए जाएंगे।
समझौते के तहत हुए मुख्य बदलाव
- Strait of Hormuz: ईरान अब व्यापारिक जहाजों के लिए इस रास्ते को फिर से खोलेगा और अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म कर देगा।
- युद्धविराम: इस डील के जरिए इसराइल और ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह के बीच भी सीजफायर होगा।
- परमाणु बातचीत: परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा के लिए 60 दिनों का समय तय किया गया है। ईरान ने वादा किया है कि वह यूरेनियम की बढ़ोतरी नहीं करेगा और न ही नए परमाणु केंद्र बनाएगा।
- संपत्ति की वापसी: ईरान की जमी हुई संपत्ति में से करीब 12 अरब से 24 अरब डॉलर वापस मिल सकते हैं, जो कुछ शर्तों के पूरा होने पर मिलेगा।
- तेल प्रतिबंध: अमेरिका ने तय किया है कि वह एक निश्चित समय तक तेल से जुड़े प्रतिबंधों में ढील देगा और कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा।