अमेरिका और ईरान के बीच सालों से चली आ रही दुश्मनी अब खत्म हो सकती है। ईरान के विदेश मंत्री ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच एक समझौता (MoU) होने वाला है। इस डील को ‘इस्लामाबाद समझौता’ कहा जा रहा है क्योंकि पाकिस्तान ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है।
क्या है इस समझौते में
ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने बताया कि यह समझौता दोनों देशों के बीच संघर्ष को पूरी तरह खत्म करने के लिए है। इस डील की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
- दुश्मनी खत्म: दोनों देश अब एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे और न ही युद्ध की धमकी देंगे।
- सम्मान: USA अब ईरान की संप्रभुता का पूरा सम्मान करेगा।
- समुद्री रास्ता: Strait of Hormuz को फिर से खोला जाएगा। ईरान यहाँ अपनी सैन्य मौजूदगी रखेगा और टोल के बजाय सर्विस फीस लेगा।
- संपत्ति की वापसी: अमेरिका ने ईरान की जमी हुई सभी संपत्तियों को वापस करने का वादा किया है।
- नुकसान की भरपाई: युद्ध से हुए नुकसान को ठीक करने के लिए एक पुनर्निर्माण योजना बनाई जाएगी जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था को मदद मिलेगी।
दो चरणों में होगा काम
इस पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया को दो हिस्सों में बांटा गया है। पहले चरण में इस शुरुआती MoU पर साइन होंगे, जो संभवतः डिजिटल तरीके से किया जाएगा। दूसरे चरण में अगले 60 दिनों तक बातचीत चलेगी, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अमेरिकी प्रतिबंधों (sanctions) को हटाने पर चर्चा होगी। ईरान की शर्त है कि उसके परमाणु ईंधन को केवल ईरान की जमीन पर ही कम किया जाए।
तनाव और चेतावनी
एक तरफ जहाँ समझौते की बात चल रही है, वहीं दूसरी तरफ तनाव भी देखा गया है। 12 जून 2026 को US Central Command ने बताया कि उन्होंने Strait of Hormuz में ईरान के कई ड्रोन हमलों को रोका है। इस घटना के बाद राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री का कहना है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना दबाव बनाए रखेंगे।
नेताओं के बयान
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने कन्फर्म किया है कि दोनों देशों के बीच एक फाइनल टेक्स्ट पर सहमति बन गई है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने भी इशारा किया है कि यह डील कुछ ही दिनों में या आने वाले सोमवार तक फाइनल हो सकती है। हालांकि, ईरान के अंदर कुछ कट्टरपंथी नेता इस डील को लेकर शक जता रहे हैं।
