अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई उच्च-स्तरीय बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई है। दोनों देश एक बड़े समझौते के बहुत करीब थे, लेकिन आखिरी समय में मतभेदों की वजह से बात बिगड़ गई। इस विफलता के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य की नौसैनिक नाकाबंदी का आदेश दे दिया है।

बातचीत क्यों टूटी और ईरान ने क्या आरोप लगाए?

ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को बताया कि अमेरिका ने बातचीत के दौरान बार-बार शर्तें बदलीं और दबाव बनाने की नीति अपनाई। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष “Islamabad MoU” पर हस्ताक्षर करने से बस कुछ इंच दूर थे, लेकिन अमेरिका के रवैये की वजह से समझौता नहीं हो पाया। ईरान का दावा है कि उसने पिछले 50 वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण बातचीत में पूरी सद्भावना दिखाई थी।

अमेरिका का पक्ष और ट्रम्प का कड़ा फैसला

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति JD Vance ने पुष्टि की कि कोई समझौता नहीं हुआ क्योंकि ईरान ने अमेरिका की शर्तों को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन की “लाल रेखाएं” तय थीं और ईरान उन पर सहमत नहीं हुआ। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वार्ता विफल होते ही होर्मुज़ जलडमरूमध्य की नौसैनिक नाकाबंदी की घोषणा कर दी है, जो सोमवार सुबह से प्रभावी हो गई है।

दोनों देशों की मुख्य मांगें क्या थीं?

ईरान की मांगें अमेरिका की मांगें
युद्ध समाप्त करने की लिखित गारंटी यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह समाप्त करना
होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण प्रमुख परमाणु संवर्धन सुविधाओं को नष्ट करना
हिज़्बुल्लाह पर इजरायली हमलों को रोकना हमास, हिज़्बुल्लाह और हौथियों की फंडिंग बंद करना
नागरिक परमाणु कार्यक्रम का अधिकार होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बिना टोल के पूरी तरह खोलना
Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com