अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में एक बड़ा मोड़ आया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने साफ किया है कि ईरान अब यह समझ चुका है कि परमाणु हथियार बनाना अमेरिका के लिए एक ‘रेड लाइन’ यानी ऐसी सीमा है जिसे पार नहीं किया जा सकता। अमेरिका का दावा है कि वह पूरी ईमानदारी से बातचीत कर रहा है ताकि एक बड़े युद्ध को टाला जा सके।
अमेरिका की शर्तें क्या हैं और ईरान का क्या स्टैंड है?
अमेरिकी सरकार ने ईरान के लिए कुछ बहुत सख्त शर्तें रखी हैं। White House की डिप्टी प्रेस सचिव Anna Kelly ने बताया कि ईरान को अपने परमाणु इरादों को पूरी तरह छोड़ना होगा। अमेरिका चाहता है कि ईरान संवर्धित यूरेनियम (enriched uranium) को अपने पास न रखे और अपने परमाणु केंद्रों को पूरी तरह बंद कर दे।
- उपराष्ट्रपति JD Vance के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि ईरान ऐसी प्रक्रिया अपनाए जिससे वह भविष्य में भी परमाणु हथियार न बना सके।
- अमेरिका की मांग है कि ईरान आतंकी समूहों को पैसा देना बंद करे और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बिना किसी टोल के सबके लिए खोले।
- दूसरी तरफ, ईरान के रक्षा अधिकारी Ali Shamkhani ने कहा है कि उनका मिसाइल प्रोग्राम उनके लिए ‘रेड लाइन’ है और इस पर कोई बात नहीं होगी।
क्या ईरान पर फिर होगा हमला? डोनाल्ड ट्रंप ने क्या चेतावनी दी?
राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि उन्होंने ईरान पर होने वाले एक सैन्य हमले को फिलहाल टाल दिया है। यह फैसला उन्होंने Qatar, UAE और Saudi Arabia जैसे खाड़ी देशों के अनुरोध पर लिया है क्योंकि इन देशों ने बातचीत में प्रगति की बात कही थी।
हालांकि, ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर परमाणु समझौते पर जल्द ही सहमति नहीं बनी, तो अमेरिका कुछ ही दिनों के भीतर फिर से ईरान पर हमला कर सकता है। इसी बीच ऐसी खबरें भी आई हैं कि ईरान ने सीजफायर के समय का इस्तेमाल अपनी उन मिसाइल साइटों को ठीक करने में किया है जिन्हें अमेरिकी हमलों में नुकसान पहुँचाया गया था।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अमेरिका की ‘रेड लाइन’ का क्या मतलब है?
अमेरिका के लिए ‘रेड लाइन’ का मतलब है कि वह ईरान को किसी भी हाल में परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देगा। इसमें यूरेनियम का संवर्धन रोकना और परमाणु केंद्रों को नष्ट करना शामिल है।
खाड़ी देशों ने इस विवाद में क्या भूमिका निभाई?
Qatar, UAE और Saudi Arabia ने राष्ट्रपति Donald Trump से अनुरोध किया था कि वह ईरान पर सैन्य हमला टाल दें ताकि बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सके।
