अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने की उम्मीद जगी है। पाकिस्तान की मदद से दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है और व्हाइट हाउस को इस बारे में सकारात्मक संकेत मिले हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को रोक दिया है, जिससे क्षेत्र में शांति की संभावना बढ़ गई है।
अमेरिका और ईरान के बीच क्या है प्रस्तावित शांति समझौता?
दोनों देश एक छोटे समझौते (MoU) पर करीब पहुंचे हैं जिससे युद्ध खत्म हो सके। इस योजना के तहत कुछ मुख्य बातें सामने आई हैं:
- युद्ध खत्म करने की घोषणा के बाद 30 दिनों तक बातचीत होगी ताकि परमाणु मुद्दों और अन्य विवादों को सुलझाया जा सके।
- ईरान अस्थायी तौर पर यूरेनियम बनाना रोकेगा।
- अमेरिका धीरे-धीरे प्रतिबंध हटाएगा और ईरान के जमे हुए अरबों डॉलर वापस करेगा।
- ईरान अपने हाई-एनरिच्ड यूरेनियम के स्टॉक को देश से बाहर भेजेगा।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर लगी पाबंदियां हटाई जाएंगी।
ईरान इस समय अमेरिका के 14 बिंदुओं वाले प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है। हालांकि, दोनों पक्षों ने अभी तक किसी अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, लेकिन यह अब तक की सबसे बड़ी प्रगति है।
पाकिस्तान और सऊदी अरब की इस बातचीत में क्या भूमिका है?
इस पूरे विवाद को सुलझाने में पाकिस्तान अकेला मध्यस्थ (Mediator) बनकर काम कर रहा है। 6 मई 2026 को व्हाइट हाउस ने बताया कि पाकिस्तान के जरिए ईरान की तरफ से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ (सफिनों को रास्ता दिखाने वाला अभियान) रोकने के फैसले का शुक्रिया अदा किया है।
दूसरी तरफ, सऊदी अरब ने भी इस मामले में दखल देते हुए 5 मई को तनाव न बढ़ाने की अपील की थी। सऊदी अरब चाहता है कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रुके ताकि पूरे खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
प्रोजेक्ट फ्रीडम क्या है और इसे क्यों रोका गया?
प्रोजेक्ट फ्रीडम अमेरिका का एक ऑपरेशन था जिसके तहत हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर फंसे जहाजों को रास्ता दिखाया जा रहा था। ईरान के साथ शांति वार्ता में प्रगति होने के कारण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे निलंबित कर दिया है।
ईरान और अमेरिका के बीच समझौता किन शर्तों पर हो सकता है?
समझौते में ईरान द्वारा यूरेनियम संवर्धन रोकने और हाई-एनरिच्ड यूरेनियम को बाहर भेजने की बात है, जबकि अमेरिका बदले में प्रतिबंध हटाएगा और ईरान की जमी हुई संपत्ति वापस करेगा।