अमेरिका और ईरान के बीच शांति की कोशिशें नाकाम हो गई हैं। इस्लामाबाद में हुई लंबी बातचीत के बाद भी दोनों देश किसी नतीजे पर नहीं पहुँच पाए। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी का आदेश दे दिया है, जिससे व्यापार पूरी तरह रुक गया है। दुनिया भर की नज़रें अब 22 अप्रैल पर हैं जब वर्तमान युद्धविराम खत्म होगा।
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इस्लामाबाद में बातचीत क्यों फेल हुई और अब क्या स्थिति है?
पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता चल रही थी, जो 12 अप्रैल को खत्म हुई। इस बातचीत में अमेरिका की ओर से JD Vance और ईरान की ओर से Mohammad Bagher Qalibaf ने नेतृत्व किया। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह बंद करे और यूरेनियम का स्टॉक खत्म करे। वहीं, ईरान ने यूरेनियम समृद्ध करने के अपने अधिकार और प्रतिबंधों को हटाने की मांग की। दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाई और बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई।
समुद्री नाकाबंदी और ceasefire का आम लोगों पर क्या असर होगा?
बातचीत टूटने के बाद 13 अप्रैल से अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी शुरू कर दी है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि अब ईरान का समुद्री व्यापार पूरी तरह बंद हो चुका है। फिलहाल दोनों देशों के बीच एक ceasefire (युद्धविराम) लागू है जो 22 अप्रैल को खत्म होगा। तुर्की और ओमान जैसे देश इस ceasefire को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि दोबारा बातचीत शुरू हो सके। IMF ने चेतावनी दी है कि इस तनाव की वजह से दुनिया भर में आर्थिक मंदी आ सकती है, जिसका असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
| पक्ष | मुख्य मांगें और स्थिति | प्रमुख लोग |
|---|---|---|
| अमेरिका | परमाणु कार्यक्रम बंद करना और यूरेनियम स्टॉक हटाना | डोनाल्ड ट्रंप, JD Vance |
| ईरान | प्रतिबंध हटाना और यूरेनियम समृद्ध करने का अधिकार | Mohammad Bagher Qalibaf |
| मध्यस्थ | ceasefire को आगे बढ़ाना और बातचीत शुरू कराना | पाकिस्तान, तुर्की, ओमान |
