अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 जुलाई 2026 को यह चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान द्वारा जहाजों पर किए जाने वाले हर नए हमले के बदले में अमेरिका ईरान के किसी न किसी ब्रिज या पावर प्लांट को नष्ट कर देगा। इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पहले ही काफी धीमी हो चुकी है और अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 30 से ज्यादा ऐसी घटनाओं की पुष्टि की है।
ईरान की चेतावनी और क्षेत्रीय प्रभाव
इस धमकी के जवाब में ईरान के विदेश मंत्री सयद अब्बास अरागची ने कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा के लिए ईंट का जवाब पत्थर से देने को तैयार है। वहीं, ईरानी संसद के नेता मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने चेतावनी दी कि अगर ईरान को तेल बेचने से रोका गया तो क्षेत्र का कोई भी देश तेल नहीं बेच पाएगा। ईरान के सैन्य मुख्यालय ने भी साफ कर दिया है कि अगर अमेरिका उनके बुनियादी ढांचे को निशाना बनाता है, तो वे पूरे क्षेत्र की ऊर्जा और आर्थिक संपत्तियों को अपना लक्ष्य बनाएंगे।
मौजूदा स्थिति और सैन्य कार्रवाई
अमेरिकी सेना ने 23 जुलाई 2026 तक लगातार 12वीं रात ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए हैं। इन हमलों में रामशिर, अहवाज और बुशहर प्रांत में मिसाइल, ड्रोन और वायु रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाया गया है। ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार शलमचेह में दो लोगों की मौत हुई है। दूसरी तरफ, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज में तीन तेल टैंकरों को रोकने का दावा किया है, जबकि यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में दो टैंकरों पर हमला किया। कुवैत के डिफेंस सिस्टम ने दुश्मन के ड्रोन को मार गिराया और जॉर्डन ने भी चार ईरानी मिसाइलों को नष्ट किया। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एशियाई नेताओं को सचेत करते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है। अमेरिकी विदेश विभाग ने वहां मौजूद अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा अलर्ट भी जारी किया है।
