इज़राइल में अमेरिका के राजदूत Mike Huckabee ने खाड़ी देशों के सामने एक बड़ी चुनौती रख दी है। उन्होंने साफ़ कहा है कि अब इन देशों को यह चुनना होगा कि वे इज़राइल के साथ हैं या ईरान के साथ। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है और कई देश अब्राहम समझौते (Abraham Accords) से जुड़ने पर विचार कर रहे हैं।
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UAE को इज़राइल से मिली बड़ी सैन्य मदद, क्या है पूरा मामला?
राजदूत Mike Huckabee ने 12 मई, 2026 को एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि ईरान के साथ युद्ध के दौरान इज़राइल ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को आयरन डोम बैटरी और चलाने वाले कर्मचारी भेजे थे। इसका मकसद UAE को हवाई हमलों से बचाना था। किसी सरकारी अधिकारी ने पहली बार इस मदद की बात सार्वजनिक की है। यह फैसला इज़राइली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और UAE के राष्ट्रपति Sheikh Mohamed bin Zayed के बीच बातचीत के बाद लिया गया था।
डोनाल्ड ट्रंप का ईरान को कड़ा जवाब और सैन्य चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 12 मई, 2026 को ईरान द्वारा भेजे गए शांति प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया। ट्रंप ने इस प्रस्ताव को “अस्वीकार्य” और “कचरा” बताया। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान फिर से शुरू करने पर गंभीरता से सोच रहा है। इससे पहले 10 मई को ईरान ने कुछ खाड़ी देशों और एक व्यापारिक जहाज पर हमले किए थे ताकि तेल की कीमतों को बढ़ाकर अमेरिका पर दबाव बनाया जा सके।
UAE की गुप्त कार्रवाई और क्षेत्रीय तनाव की स्थिति
रिपोर्ट्स के मुताबिक, UAE ने सार्वजनिक तौर पर इनकार करने के बावजूद ईरान के अंदर गुप्त हमले किए। इसमें ईरान के लवान द्वीप पर स्थित एक तेल रिफाइनरी पर हमला शामिल है। वहीं, Mike Huckabee ने तेल अवीव विश्वविद्यालय में कहा कि इज़राइल का मकसद किसी की जमीन कब्जा करना नहीं बल्कि अपनी रक्षा करना है। हालांकि, गाजा, लेबनान और सीरिया में इज़राइल की सैन्य कार्रवाइयों को लेकर कई अरब देशों में अब भी काफी नाराज़गी है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
इज़राइल ने UAE की मदद कैसे की?
इज़राइल ने UAE को हवाई हमलों से बचाने के लिए आयरन डोम बैटरी और उन्हें संचालित करने वाले कर्मी भेजे थे, जिसकी पुष्टि अमेरिकी राजदूत Mike Huckabee ने की।
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव पर क्या कहा?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 12 मई, 2026 को ईरान के शांति प्रस्ताव को कचरा और अस्वीकार्य बताते हुए खारिज कर दिया और सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए।
