अमेरिका का बड़ा कदम, रूस से तेल खरीदने वाले भारत समेत 5 देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का बिल पास.

Praggya Singh sabal11 August 20263 min read58 viewsIndia
अमेरिका का बड़ा कदम, रूस से तेल खरीदने वाले भारत समेत 5 देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का बिल पास.

रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिका ने शिकंजा कसने की पूरी तैयारी कर ली है और अमेरिकी सीनेट ने एक नया प्रस्ताव भारी बहुमत से मंजूर कर लिया है। इस नए घटनाक्रम के तहत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान पर अमेरिकी आयात के दौरान 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि राहत की बात यह है कि यह नया टैरिफ नियम अभी तुरंत लागू नहीं किया गया है और इस बिल को कानून का रूप लेने के लिए अभी और कई कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 'द गार्डियन' और अन्य माध्यमों से सामने आई इस जानकारी में बताया गया है कि साल 2022 के बाद से भारत ने रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना काफी ज्यादा बढ़ा दिया था जिससे देश की घरेलू ऊर्जा जरूरतों को संभालने में बहुत बड़ी मदद मिली थी।

क्या है पूरा मामला और कैसे काम करेगा यह नया प्रस्तावित कानून

अमेरिकी सीनेट में लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 को 86-11 के भारी बहुमत से पास कर दिया गया है। इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बनाना है ताकि यूक्रेन युद्ध के खिलाफ पश्चिमी देशों की रणनीति को और अधिक मजबूत किया जा सके। इस बिल के दायरे में आने वाले देशों से अमेरिका में आने वाले सभी प्रकार के सामानों पर भारी भरकम टैक्स लगाया जा सकता है। हालांकि अभी यह सिर्फ एक बिल है और इसे कानून बनने के लिए अमेरिकी प्रतिनिधि यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से मंजूरी मिलनी बाकी है। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के बाद ही यह आधिकारिक तौर पर कानून बन पाएगा। इसके अलावा कानून बन जाने के बाद भी यह स्वतः लागू नहीं होगा बल्कि राष्ट्रपति के विवेक पर निर्भर करेगा कि वह इसका इस्तेमाल कब और किस देश के खिलाफ करना चाहते हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था और निर्यात पर क्या होगा इसका असर

यदि यह बिल आगे चलकर पूर्ण रूप से कानून बन जाता है और अमेरिका इसका इस्तेमाल करता है तो इसका सीधा असर भारतीय निर्यातकों पर पड़ सकता है। अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद महंगे हो जाएंगे जिससे उनकी मांग कम हो सकती है और दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों पर भी दबाव बढ़ सकता है। हालांकि भारतीय रिफाइनरियों को रूस से मिलने वाले सस्ते कच्चे तेल के कारण ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती रही है। इस नए बिल में केवल तेल खरीदने वाले देशों को ही नहीं बल्कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, शीर्ष सैन्य अधिकारियों, बड़े कारोबारी समूहों, वित्तीय संस्थानों और ऊर्जा क्षेत्र को भी कड़े प्रतिबंधों के दायरे में रखा गया है। इसके अलावा रूसी तेल के परिवहन में इस्तेमाल होने वाले 'शैडो फ्लीट' के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की योजना बनाई गई है और रूस के निर्यात पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने के प्रावधान भी इस बिल का हिस्सा हैं। अमेरिकी संसद में इस पर लंबी चर्चा हुई जहां कुछ सीनेटरों ने राष्ट्रपति को इतने व्यापक अधिकार दिए जाने का विरोध भी किया था, लेकिन इसके बावजूद भारी समर्थन के साथ इसे आगे बढ़ा दिया गया है।

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