मिडिल ईस्ट में अमेरिका का बड़ा कदम, USS George Washington कैरियर स्ट्राइक ग्रुप क्षेत्र में तैनात.

अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड CENTCOM ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि USS George Washington (CVN 73) कैरियर स्ट्राइक ग्रुप मिडिल ईस्ट के ऑपरेशनल क्षेत्र में पहुंच गया है। इस शक्तिशाली Nimitz-class एयरक्राफ्ट कैरियर को 20 अगस्त 2026 को अरब सागर से गुजरते हुए देखा गया, जहां इसके उड़ान डेक पर नाविक पूरी तरह सक्रिय नजर आए। इस युद्धपोत की क्षेत्र में आधिकारिक तौर पर एंट्री 19 अगस्त 2026 को हुई थी, जिसके बाद से सुरक्षा गतिविधियों को और अधिक तेज कर दिया गया है।
USS Abraham Lincoln की जगह ली
यह नया डिप्लॉयमेंट एक तयशुदा रूटीन रोटेशन का हिस्सा है, जिसके तहत इस युद्धपोत ने USS Abraham Lincoln (CVN 72) की जगह ली है। पिछला युद्धपोत लगभग 250 से 265 दिनों के अपने लंबे डिप्लॉयमेंट को पूरा कर रहा है। आपको बता दें कि USS Abraham Lincoln ने मूल रूप से नवंबर 2025 में सैन डिएगो से अपनी यात्रा शुरू की थी और फिर जनवरी 2026 में इस क्षेत्र की तरफ मोड़ दिया गया था। इस दौरान इस पोत ने Operation Epic Fury में हिस्सा लिया और ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी को सख्ती से लागू किया था।
चालक दल की स्थिति और आधिकारिक बयान
USS Abraham Lincoln के लंबे मिशन को लेकर उठ रही चिंताओं और चर्चाओं पर अमेरिकी 5th फ्लीट के प्रवक्ता Cmdr. Joseph Hontz ने अपनी बात रखी। उन्होंने स्वीकार किया कि इतने लंबे डिप्लॉयमेंट के दौरान चालक दल को कुछ प्रकार की जरूरी चीजों की मामूली कमी का सामना करना पड़ा। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि जहाज पूरी तरह से अपनी मिशन क्षमता में सक्षम बना हुआ है और उन्होंने नाविकों की हिम्मत की जमकर तारीफ की।
इसके अलावा, एक अन्य अमेरिकी नौसेना प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि जहाज पर मौजूद क्रू के बीच आत्महत्या के विचारों या आत्महत्या के प्रयासों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं मिला है। पेंटागन ने उन सभी रिपोर्ट्स को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि जहाज पर मनोबल में भारी गिरावट आई है या खान-पान की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। सेना की ओर से यह भी कहा गया है कि सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य और धार्मिक जरूरतों के लिए लगातार मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई जा रही है ताकि किसी भी जवान को परेशानी न हो।