अमेरिका का विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford इस समय Red Sea में तैनात है और वहां से अपनी उड़ानें जारी रखे हुए है। अमेरिका ने ईरान पर लगाई गई समुद्री पाबंदी को और भी सख्त कर दिया है। CENTCOM के कमांडर Brad Cooper ने पुष्टि की है कि अमेरिकी सेना ने इस नाकेबंदी को लागू करने में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है।

ईरान के तेल व्यापार और जहाजों पर क्या असर हुआ

अमेरिकी सेना की सख्ती के कारण ईरान को भारी आर्थिक चोट पहुंची है। अब तक 42 कमर्शियल जहाजों को नियमों के उल्लंघन के कारण उनके रास्ते से हटा दिया गया है। इस ऑपरेशन की वजह से ईरान के तेल निर्यात पर बुरा असर पड़ा है।

विवरण आंकड़े
रोके गए कमर्शियल जहाज 42
फंसे हुए तेल टैंकर 41
फंसा हुआ कच्चा तेल 69 मिलियन बैरल
अनुमानित कुल नुकसान 6 अरब डॉलर से ज्यादा

USS Gerald Ford की वापसी और आगे की रणनीति

USS Gerald Ford ने अब तक 300 दिनों से ज्यादा का रिकॉर्ड समय समुद्र में बिताया है। अब यह जहाज अपनी होम पोर्ट Virginia वापस जाएगा। लेकिन अमेरिका इस इलाके को खाली नहीं करेगा।

  • अमेरिका के अन्य नेवल फोर्स और कई कैरियर ग्रुप इस क्षेत्र में बने रहेंगे।
  • समुद्री रास्तों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए नाकेबंदी जारी रहेगी।
  • ईरान की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अमेरिकी मौजूदगी बनी रहेगी।

Frequently Asked Questions (FAQs)

USS Gerald Ford ने ईरान के खिलाफ क्या कार्रवाई की है

USS Gerald Ford ने Red Sea में रूटीन उड़ानें जारी रखी हैं और अमेरिकी सेना ने 42 कमर्शियल जहाजों को नाकेबंदी नियमों के कारण डायवर्ट किया है।

ईरान को इस नाकेबंदी से कितना आर्थिक नुकसान हुआ है

ईरान के 41 टैंकर फंसे हुए हैं जिनमें लगभग 69 मिलियन बैरल कच्चा तेल है और इसकी कुल कीमत 6 अरब डॉलर से ज्यादा है।