Uttarakhand Tunnel Collapse: उत्तराखंड में सुरंग धंसने से 7 मजदूरों की मौत, 3 अभी भी लापता और बचाव अभियान जारी.

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित प्रसिद्ध विष्णुगढ़-पाइपकोटी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की एक सुरंग अचानक ढहने की वजह से बड़ा हादसा हो गया है। इस दर्दनाक दुर्घटना में सात मजदूरों की मौत हो गई है, जबकि तीन मजदूर अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। गुरुवार देर रात हुए इस हादसे ने एक बार फिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा के इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अचानक पानी और मलबा भरने की वजह से साइट पर काम कर रहे कुल 22 मजदूर अंदर ही फंस गए थे। रातभर चले बचाव अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने 12 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन इस बीच कई लोगों की जान चली गई। हादसे में घायल हुए 14 लोगों को तुरंत इलाज के लिए गोपेश्वर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है।
राहत और बचाव कार्यों में जुटी कई एजेंसियां
घटना की गंभीरता को देखते हुए राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की लगातार निगरानी कर रहे हैं। सुरंग के अंदर फंसे बाकी लोगों को ढूंढने और स्थिति को संभालने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी NDRF, राज्य आपदा मोचन बल यानी SDRF, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस यानी ITBP और सेना के जवान पूरी ताकत से जुटे हुए हैं। हालांकि, बचाव दल के सामने इस समय कई बड़ी रुकावटें आ रही हैं, जिनमें लगातार बढ़ता जलस्तर और मलबे को हटाने का मुश्किल काम शामिल है। घटनास्थल पर स्थिति बहुत तनावपूर्ण बनी हुई है और अधिकारी हरसंभव प्रयास कर रहे हैं कि किसी तरह सुरक्षित बचे लोगों को बाहर निकाला जा सके और लापता लोगों का पता लगाया जा सके।
हादसे के कारणों की हो रही है जांच
इस पूरे प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य एचसीसी यानी HCC ठेकेदार कंपनी के जरिए कराया जा रहा था। THDC के कार्यकारी निदेशक कुमार शरद ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस बात की गहराई से जांच की जा रही है कि आखिर अचानक पानी और मलबा आने की मुख्य वजह क्या थी और इस सुरक्षा चूक के लिए कौन जिम्मेदार है। इस दुखद घटना के बाद प्रशासन केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों के साथ भी तालमेल बिठा रहा है। जिन मजदूरों के परिवार झारखंड और छत्तीसगढ़ राज्यों से ताल्लुक रखते हैं, उनके परिजनों को हर संभव सहायता और राहत पहुंचाने के लिए उत्तराखंड सरकार वहां के स्थानीय प्रशासन से लगातार बातचीत कर रही है ताकि पीड़ित परिवारों को इस मुश्किल समय में सहारा दिया जा सके।