पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में हालात खराब हो गए हैं। 28 जुलाई 2026 को हिंसा रावलकोट से फैलकर मीरपुर तक पहुंच गई। सोशल मीडिया और स्थानीय खबरों के अनुसार सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसमें कई लोगों के मारे जाने की खबर है। इससे एक दिन पहले रावलकोट में हुए संघर्ष में करीब 14 लोगों की मौत होने का दावा किया गया है।
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प्रदर्शन और मांगें
यह पूरा विवाद जून 2026 से चल रहा है। Jammu Kashmir Joint Awami Action Committee (JAAC) की अगुवाई में लोग आर्थिक न्याय और राजनीतिक अधिकारों के लिए सड़कों पर हैं। उनकी मुख्य मांगें आर्थिक सुधार और रिफ्यूजियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को खत्म करना है। 5 जून 2026 को PoJK सरकार ने JAAC को आतंकी संगठन बताकर बैन कर दिया था, जिसके बाद से तनाव और बढ़ गया है।
प्रशासन और सुरक्षा का पक्ष
AJK पुलिस का कहना है कि प्रतिबंधित JAAC ने रावलकोट के पास सुरक्षा चौकी पर हमला किया था, जिसमें एक सुरक्षाकर्मी की मौत हुई और तीन पुलिस वाले जख्मी हुए। हालांकि, JAAC ने इन आरोपों को पूरी तरह नकार दिया है और सुरक्षा बलों पर निहत्थे नागरिकों को निशाना बनाने का इल्जाम लगाया है।
अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर United Nations Human Rights एजेंसी ने चिंता जताई है और पाकिस्तान सरकार से शांति बनाए रखने की अपील की है। साथ ही इंटरनेट पाबंदियों की भी आलोचना की है। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस पर गहरी चिंता जाहिर की है। उधर, सुप्रीम कोर्ट ने रिफ्यूजी सीटों को संवैधानिक बताया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khwaja Asif के एक बयान से विवाद और गहरा गया, जिसमें उन्होंने रावलकोट और मीरपुर के लोगों को कश्मीरी मानने से इनकार किया था। फिलहाल, क्षेत्र के कई हिस्सों में इंटरनेट बंद है और Sudhnoti व Rawalakot में होने वाले चुनाव 10 अगस्त तक के लिए टाल दिए गए हैं।
