पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी संकट की वजह से पूरी दुनिया में ऊर्जा और तेल के दामों में भारी उछाल आया है. अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई हिस्सों में कीमतें 20 से 50 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं. लेकिन भारत में आम जनता को इस असर का बहुत कम सामना करना पड़ा. पूर्व विदेश सचिव और राज्यसभा सांसद हर्ष वर्धन श्रृंगला ने बताया कि भारत सरकार की सही प्लानिंग और दूरदर्शिता की वजह से देश इस बड़े संकट से बच गया.

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भारत ने तेल संकट का सामना कैसे किया?

हर्ष वर्धन श्रृंगला ने कहा कि भारत ने पिछले एक दशक (2014-2026) में अपनी ऊर्जा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई बड़े बदलाव किए. इसी तैयारी की वजह से भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले दो महीने से ज्यादा स्थिर रही हैं. देश में न तो ईंधन की राशनिंग की जरूरत पड़ी और न ही स्कूलों या दफ्तरों को बंद करना पड़ा.

  • एलपीजी टर्मिनल: भारत ने अपने LPG इम्पोर्ट टर्मिनल की संख्या दोगुनी कर दी है.
  • कच्चे तेल के स्रोत: तेल खरीदने के लिए अब भारत दुनिया के ज्यादा देशों पर निर्भर है, जिससे रिस्क कम हुआ है.
  • रणनीतिक भंडार: सरकार ने Strategic Petroleum Reserves बनाए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर तेल की कमी न हो.
  • इथेनॉल का इस्तेमाल: पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट को बढ़ाकर 20% कर दिया गया है.

इसके अलावा, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने खुद काफी नुकसान सहा ताकि उपभोक्ताओं को तेल की सप्लाई बिना किसी रुकावट और सही दाम पर मिलती रहे.

एनर्जी सेक्टर में भारत की बड़ी उपलब्धियां और लक्ष्य

भारत अब सिर्फ तेल पर निर्भर नहीं रहना चाहता, इसलिए सरकार ने सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा पर जोर दिया है. जून 2025 तक भारत ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की, जहां कुल बिजली उत्पादन क्षमता का 50% हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन (non-fossil fuel) से आने लगा. यह लक्ष्य पेरिस समझौते के तहत 2030 के लिए था, जिसे भारत ने 5 साल पहले ही पूरा कर लिया.

क्षेत्र/देश ऊर्जा कीमतों का असर भारत की स्थिति
अमेरिका और यूरोप 20% से 50% तक बढ़ोतरी कीमतें स्थिर रहीं
एशिया के कुछ हिस्से भारी वृद्धि कोई सप्लाई शॉर्टेज नहीं
बिजली क्षमता (Non-Fossil) 50% लक्ष्य जून 2025 तक पूरा

संकट से निपटने के लिए उठाए गए जरूरी कदम

IEA ट्रैकर के मुताबिक, मिडिल ईस्ट के संघर्ष के दौरान भारत ने कई आपातकालीन कदम उठाए. इनमें सरकारी बैंकों के लिए वीडियो कॉल और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को प्राथमिकता देना शामिल था. साथ ही, उद्योगों में नेचुरल गैस के इस्तेमाल की सीमा तय की गई और घरेलू LPG की जगह पाइप वाली गैस (PNG) के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया गया. आम लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने और गैर-जरूरी विदेशी यात्राएं न करने की सलाह दी गई.

Frequently Asked Questions (FAQs)

दुनिया में तेल दाम बढ़ने के बावजूद भारत में कीमतें स्थिर क्यों रहीं?

भारत ने 2014 से 2026 के बीच रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाए, इथेनॉल ब्लेंडिंग को 20% तक पहुंचाया और तेल के आयात के लिए नए देशों से संपर्क साधा. साथ ही सरकारी तेल कंपनियों ने नुकसान खुद वहन किया.

भारत ने बिजली उत्पादन के क्षेत्र में कौन सा बड़ा लक्ष्य समय से पहले पूरा किया?

भारत ने जून 2025 तक अपनी कुल बिजली क्षमता का 50% हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से हासिल कर लिया, जो पेरिस समझौते के 2030 के लक्ष्य से 5 साल पहले है.

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com