सोमवार 9 मार्च 2026 को संसद के लोकसभा में पश्चिम एशिया के हालात को लेकर भारी हंगामा देखने को मिला। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार से पूरी चर्चा की मांग कर रहा था जिसके कारण सदन की कार्यवाही को अगले दिन सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने सदन में साफ किया कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता खाड़ी देशों में रहने वाले लगभग 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा है। बिगड़ते हालात को देखते हुए अब तक 67 हजार से ज्यादा भारतीय सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं।
संसद में क्यों हुआ इतना हंगामा और विपक्ष की मांग?
सदन में मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और अखिलेश यादव जैसे विपक्षी नेताओं ने सरकार के सिर्फ बयान देने वाले फैसले को खारिज कर दिया। विपक्ष ने नियम 193 के तहत इस गंभीर मुद्दे पर एक विस्तृत चर्चा की मांग रखी। विपक्षी सांसद लगातार अपनी मांगों को लेकर वेल में आ गए जिसके बाद पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल को सदन की कार्यवाही मंगलवार 10 मार्च तक रोकनी पड़ी। इस दिन लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने खुद को कुर्सी से अलग रखा क्योंकि उनके खिलाफ विपक्ष का एक प्रस्ताव भी चर्चा की लिस्ट में था। यह पूरा संकट 28 फरवरी 2026 को एक बड़े हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत के बाद से शुरू हुआ है।
खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों पर क्या असर होगा?
पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते माहौल के बीच भारत सरकार और विदेश मंत्रालय पूरी तरह से अलर्ट है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि खाड़ी देशों में करीब 1 करोड़ भारतीय काम करते हैं और उनकी हिफाजत सरकार के लिए सबसे ऊपर है। खतरे को देखते हुए अब तक 67,000 भारतीय नागरिक सुरक्षित लौट आए हैं। विदेश मंत्रालय खास तौर पर तेहरान से भारतीय छात्रों और व्यापारियों को सुरक्षित निकालने का काम कर रहा है। इसके साथ ही भारत ने मानवीय आधार पर 4 मार्च को कोच्चि में ईरान के जहाज को रुकने और तकनीकी मदद की अनुमति देकर एक सकारात्मक कदम उठाया है।
आम आदमी की जेब पर कैसे पड़ रहा है इसका सीधा असर?
इस विदेशी संकट का असर सीधे तौर पर भारत की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की रसोई पर पड़ रहा है। विपक्ष ने सदन में बताया कि खाड़ी देशों के विवाद के कारण घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है। कमर्शियल गैस के दाम भी 115 रुपये तक बढ़ गए हैं। भारत और खाड़ी देशों के बीच सालाना लगभग 200 अरब डॉलर का व्यापार होता है। समुद्री रास्तों में परेशानी के कारण इस व्यापार पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है जिससे आने वाले दिनों में ऊर्जा संकट और महंगाई बढ़ने की आशंका है।