West Asia Crisis: खाड़ी देशों में तनाव के बीच भारत सरकार अलर्ट, 52 हजार भारतीय सुरक्षित लौटे वतन

Aanya9 March 20262 min read36 viewsExpat Issues

ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद खाड़ी देशों में तनाव काफी बढ़ गया है। इसे लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 9 मार्च 2026 को राज्यसभा में पूरी स्थिति की जानकारी दी। सरकार ने साफ किया है कि इस मुश्किल समय में भारत कूटनीति और बातचीत के जरिए शांति की अपील कर रहा है। इसके साथ ही गल्फ देशों में काम करने वाले करीब 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा और उनकी वापसी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

खाड़ी देशों से कैसे हो रही भारतीयों की वापसी

तनाव के बीच गल्फ देशों से भारतीयों को निकालने का काम तेजी से चल रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार 1 मार्च से 7 मार्च 2026 के बीच 52 हजार से ज्यादा भारतीय सुरक्षित अपने देश लौट चुके हैं। इनमें से 32,107 लोग भारतीय उड़ानों के जरिए वापस आए हैं। इसके लिए 280 से ज्यादा कमर्शियल और स्पेशल फ्लाइट्स का इंतजाम किया गया। विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि ईरान की राजधानी तेहरान में मौजूद भारतीय दूतावास पूरी तरह से काम कर रहा है और वहां पढ़ रहे छात्रों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट कर दिया गया है। दुबई, आबू धाबी, रियाद और कुवैत जैसे प्रमुख शहरों में 24 घंटे काम करने वाली हेल्पलाइन भी शुरू की गई है।

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भारत की सुरक्षा और सप्लाई चेन पर क्या पड़ेगा असर

विदेश मंत्री जयशंकर ने इस बात पर चिंता जताई कि इस युद्ध की वजह से ग्लोबल सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले तेल और गैस की सप्लाई पर भी खतरा मंडरा रहा है जिससे ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। आम लोगों पर इसका सीधा असर न पड़े, इसके लिए सरकार कदम उठा रही है। इससे पहले 1 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने भी ऊर्जा सुरक्षा और भारतीयों की सलामती को लेकर अहम बैठक की थी। सरकार का मुख्य जोर इस बात पर है कि भारतीय उपभोक्ताओं को तेल और गैस की कीमतों में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

ईरानी जहाज को भारत में मिली पनाह

इस विवाद के बीच एक और घटना सामने आई है। अमेरिका ने श्रीलंका के तट के पास एक ईरानी जहाज आईआरआईएस देना को डुबो दिया था। इसके बाद भारत ने एक अन्य ईरानी जहाज आईआरआईएस लावन को कोच्चि पोर्ट पर पनाह दी है। विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि सभी देशों को एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए और आपसी विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाना चाहिए। भारत में फंसे विदेशी नागरिकों के लिए भी सरकार ने वीजा नियमों में मदद देने की घोषणा की है ताकि उन्हें इस संकट के समय में राहत मिल सके।

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