वेस्ट बैंक की मस्जिदों में हुए हमलों के बाद दुनिया भर के कई इस्लामिक देशों में गुस्सा है। UAE समेत सात देशों ने मिलकर इस घटना की कड़ी निंदा की है। इन देशों ने साफ कहा है कि इबादतगाहों पर इस तरह के हमले अंतरराष्ट्रीय कानूनों का बड़ा उल्लंघन हैं।

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मस्जिदों में आगजनी और नुकसान

यह घटना बुधवार, 17 जून 2026 को हुई थी। हमले रामल्लाह के उत्तर में स्थित जिलजिलिया की ग्रैंड मस्जिद और मज़रा अल-नुबानी की अल-फारूक मस्जिद में किए गए। यहाँ हमलावरों ने आग लगाई और दीवारों पर कुछ लिखा। इजरायली सेना ने इस आगजनी और दीवारों पर की गई लिखावट की पुष्टि की है, लेकिन अब तक हमलावरों की पहचान नहीं हो पाई है।

विदेश मंत्रियों का साझा बयान

UAE, जॉर्डन, तुर्की, मिस्र, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, सऊदी अरब और कतर के विदेश मंत्रियों ने गुरुवार, 18 जून 2026 को एक साझा बयान जारी किया। उन्होंने इजरायली बस्तियों में रहने वाले लोगों द्वारा फिलिस्तीनियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा की कड़ी निंदा की।

  • मिनिस्टर्स ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन बताया।
  • बयान में कहा गया कि ऐसी हरकतें अस्थिरता और कट्टरपंथ को बढ़ावा देती हैं और अंतरराष्ट्रीय शांति की कोशिशों को कमजोर करती हैं।
  • सभी देशों ने इस हमले के लिए इजरायल को जिम्मेदार ठहराया।
  • अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की गई कि वह इजरायल को इस खतरनाक बढ़ोतरी को रोकने और दोषियों को सजा दिलाने के लिए मजबूर करे।

फतवा काउंसिल की चेतावनी

फिलिस्तीनी सुप्रीम फतवा काउंसिल ने भी 18 जून को एक चेतावनी जारी की। काउंसिल ने कहा कि दो मस्जिदों को जलाना इस्लामिक पवित्र स्थलों के खिलाफ एक खतरनाक कदम है, जिससे आने वाले समय में तनाव और बढ़ सकता है। इसके साथ ही काउंसिल ने अल-अक्सा मस्जिद परिसर में इजरायली घुसपैठ और वहां की जा रही रस्मों को उकसाने वाली कार्रवाई बताया।