West Bank Crisis: वेस्ट बैंक में इसराइलीSettlers का हफ्ता भर से कब्जा, पानी और बिजली कटी.

Sushma Kumari17 August 20262 min read60 viewsWorld
West Bank Crisis: वेस्ट बैंक में इसराइलीSettlers का हफ्ता भर से कब्जा, पानी और बिजली कटी.

वेस्ट बैंक के कुस्रा शहर में इसराइली Settlers की तरफ से किए गए एक हफ्ते के कड़े घेराव ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है और इस पर लगातार अंतरराष्ट्रीय निंदा सामने आ रही है। 9 अगस्त से शुरू हुई इस नाकेबंदी के कारण अबू रिदा और हसन परिवारों के लगभग 15 सदस्य, जिनमें छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल हैं, रास अल-ऐन इलाके में अपने ही घरों के अंदर फंसे हुए हैं। इन लोगों के पास पीने का पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं बची हैं और उनका जीना मुहाल हो गया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि 15 अगस्त को जब नगर पालिका के कर्मचारी वहां बिजली और पानी की लाइनें ठीक करने पहुंचे, तो Settlers ने उनके साथ मारपीट की और अगले दिन इसराइली सेना ने यूनिसेफ के मानवीय सहायता काफिले को भी आगे जाने से रोक दिया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती चिंता और तीखी प्रतिक्रियाएं

इस गंभीर मानवीय संकट को देखते हुए पोप लियो XIV ने हिंसा को तुरंत रोकने की अपील की है और स्थायी शांति तथा दो-राष्ट्र समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय दखल की मांग की है। इसके अलावा अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने भी Settlers के इन कामों को सीधे तौर पर आतंकवाद करार दिया है, जो कि इस मामले में एक दुर्लभ और काफी तीखी आलोचना है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस घेराव को इसराइल सरकार की शह पर हिंसा को रणनीतिक तरीके से बढ़ाने वाला कदम बताया है। संयुक्त राष्ट्र ने भी अपनी चेतावनी में साफ कहा है कि वेस्ट बैंक इस समय बर्बादी के कगार पर पहुंच गया है और साल 2026 की पहली छमाही में यहां हिंसा के मामलों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस पूरी स्थिति की जानकारी यूके सरकार के आधिकारिक बयान में भी दी गई है कि वेस्ट बैंक में हिंसा रोकने के लिए और अधिक कड़े कदम उठाने की जरूरत है।

इसराइली प्रशासन पर दबाव और आंकड़े

इस बीच इसराइली अधिकारियों पर इस मामले में दखल देने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है, क्योंकि शिन बेट एजेंसी इन घटनाओं में शामिल लोगों की जांच कर रही है और एक सीनियर अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी जल्द ही इस जगह का दौरा करने की तैयारी कर रहा है। हालांकि इतनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बावजूद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तरफ से इस पूरे मामले पर अभी तक कोई भी सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। इस तरह के लगातार हमलों से यह साफ पता चलता है कि कब्जा किए गए इलाकों में तनाव लगातार बढ़ रहा है और साल 2026 में पिछले साल के मुकाबले Settlers से जुड़े मामलों में 63 प्रतिशत की बड़ी तेजी आई है, जिसकी वजह से हजारों फिलिस्तीनी लोग अपने घरों से बेघर होने को मजबूर हो चुके हैं।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin
Share:

Comments

Leave a comment