पश्चिम बंगाल की नई BJP सरकार ने घुसपैठियों के खिलाफ बहुत बड़ा अभियान शुरू किया है। राज्य से हजारों मुस्लिम बांग्लादेशियों और रोहिंग्या शरणार्थियों को हिरासत में लेकर वापस भेजा जा रहा है। इस कार्रवाई के बाद अब राज्य में काफी चर्चा है और कई लोग इसे लेकर चिंता जता रहे हैं कि इससे धार्मिक तनाव बढ़ सकता है।
नया नियम क्या है और कैसे काम करेगा
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने 22 मई 2026 को एक नए सिस्टम की घोषणा की, जो 20 मई 2026 से ही लागू मान लिया गया। इस नए निर्देश के मुताबिक, अब पकड़े गए अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को अदालतों में पेश नहीं किया जाएगा। इसके बजाय, उन्हें सीधे Border Security Force (BSF) को सौंप दिया जाएगा ताकि उन्हें तुरंत डिपोर्ट किया जा सके। यह पूरा कदम केंद्र सरकार के “detect, delete and deport” वाले तरीके पर आधारित है।
होल्डिंग सेंटर और सरकारी तैयारी
सरकार ने संदिग्ध प्रवासियों को रखने के लिए मई 2026 में हर जिले में अलग से ‘होल्डिंग सेंटर’ बनाए हैं। सबसे पहला ऐसा सेंटर 25 मई 2026 को Malda जिले में चालू किया गया था। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं कि घुसपैठियों को जेल में न रखा जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि भारत के संसाधनों को इन लोगों पर बर्बाद क्यों किया जाए।
अब तक कितने लोग भेजे गए
7 या 8 जून 2026 को मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि अब तक 4,800 बांग्लादेशी नागरिकों को राज्य के डिटेंशन सेंटर्स से डिपोर्ट किया जा चुका है। जून की शुरुआत तक 836 और लोग डिपोर्ट होने के लिए इंतज़ार कर रहे थे। सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ उन बांग्लादेशी घुसपैठियों पर हो रही है, जो Citizenship Amendment Act (CAA) के दायरे में नहीं आते हैं।
विवाद और मानवाधिकारों की बात
Al Jazeera की रिपोर्ट और कई मानवाधिकार संस्थाओं ने इस अभियान पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से धार्मिक तनाव बढ़ सकता है और कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी हो सकती है। July 2025 में Human Rights Watch ने भी आरोप लगाया था कि बंगाली मुस्लिमों को बिना सही कानूनी प्रक्रिया के बाहर निकाला जा रहा है।
