पश्चिम बंगाल चुनाव: वोटर लिस्ट से नाम कटने का डर, दिल्ली-मुंबई से घर लौट रहे प्रवासी मजदूर, 19 अप्रैल तक का है समय
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही प्रवासी मजदूरों के बीच अपने वोटिंग अधिकार को लेकर चिंता बढ़ गई है। दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में काम करने वाले हजारों मजदूर अपने गांव वापस भाग रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि उनका नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया है। चुनाव आयोग की नई जांच रिपोर्ट में बड़ी संख्या में नामों को हटाया गया है या उन्हें जांच के दायरे में रखा गया है। इन सभी मजदूरों को 19 अप्रैल तक अपनी जानकारी सही कराने का मौका दिया गया है ताकि वे आने वाले चुनाव में अपना वोट डाल सकें।
वोटर लिस्ट और चुनाव से जुड़ी अहम जानकारी
चुनाव आयोग (ECI) की स्पेशल रिविजन प्रक्रिया के बाद वोटर लिस्ट में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। आयोग ने बताया है कि लिस्ट को सही और अपडेट करने के लिए लाखों नामों को हटाया गया है। इससे जुड़े मुख्य आंकड़े और तारीखें नीचे दी गई हैं:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| वोटर लिस्ट सुधार की अंतिम तारीख | 19 अप्रैल 2026 |
| लिस्ट से हटाए गए कुल वोटर | लगभग 63.66 लाख |
| जांच के घेरे में रखे गए वोटर | लगभग 60 लाख |
| चुनाव की तारीखें | 23 और 29 अप्रैल 2026 |
| वोटों की गिनती | 4 मई 2026 |
मजदूरों को मिल रही राहत और रास्ते की मुश्किलें
चुनाव आयोग ने इस बार प्रवासी मजदूरों के लिए एक राहत दी है। अगर किसी मजदूर का नाम लिस्ट में संदिग्ध पाया जाता है, तो उसकी जगह परिवार का कोई भी सदस्य सुनवाई में शामिल हो सकता है। इसके लिए मजदूर का खुद वहां शारीरिक रूप से मौजूद रहना जरूरी नहीं है। हालांकि, घर लौटने वालों की भीड़ इतनी ज्यादा है कि ट्रेनों में टिकट मिलना बहुत मुश्किल हो गया है। बंगाल स्वर्ण शिल्प कल्याण संघ ने बताया है कि मुंबई और दिल्ली से आने वाले मजदूरों को भारी ट्रांसपोर्ट किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
वोटर लिस्ट सुधार के लिए बनाए गए ट्रिब्यूनल
जिन लोगों के नाम लिस्ट से हटा दिए गए हैं, वे राज्य भर में बनाए गए 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि वोटर लिस्ट की जांच का काम इस हफ्ते के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। वर्तमान में बंगाल में कुल मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर लगभग 7.04 करोड़ रह गई है। कई रिसर्च संगठनों ने चिंता जताई है कि इस प्रक्रिया में प्रवासी मजदूरों और कमजोर वर्ग के लोगों के नाम ज्यादा कटे हैं, इसलिए लोग जल्द से जल्द अपनी पहचान पक्की करने के लिए गांव पहुंच रहे हैं।




