West Bengal Election Update: बंगाल चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में बड़ा फेरबदल, लाखों लोगों के नाम कटे, मचा बवाल
पश्चिम बंगाल में इस महीने विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। लेकिन चुनाव से ठीक पहले वोटर लिस्ट में हुए बदलाव ने राज्य में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों के नाम हटा दिए गए हैं, जिससे अब वहां राजनीतिक माहौल काफी गरमाया हुआ है।
वोटर लिस्ट से कितने लोगों के नाम हटाए गए और क्या हुआ?
Election Commission of India ने वोटर लिस्ट को सही करने के लिए Special Intensive Revision (SIR) नाम की एक प्रक्रिया चलाई। इस प्रक्रिया के बाद राज्य के करीब 76 मिलियन रजिस्टर्ड वोटरों में से लगभग 9 मिलियन लोगों के नाम लिस्ट से बाहर हो गए। यह कुल वोटरों का करीब 12% हिस्सा है। इसमें से 60 लाख लोगों को मृत या अनुपस्थित बताया गया, जबकि 30 लाख लोगों के नाम वेरिफिकेशन के लिए रोके गए हैं।
किन इलाकों में सबसे ज्यादा वोटरों के नाम कटे?
राज्य के कई जिलों में बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए गए हैं। खास तौर पर उन इलाकों में जहां मुस्लिम आबादी ज्यादा है, वहां ज्यादा असर देखा गया। इसकी पूरी जानकारी नीचे दी गई टेबल में है:
| इलाका/जिला | हटाए गए वोटरों की संख्या / विवरण |
|---|---|
| Murshidabad | लगभग 4,60,000 नाम कटे |
| North 24 Parganas | लगभग 3,30,000 नाम कटे |
| Malda | लगभग 2,40,000 नाम कटे |
| Bhabanipur | कुल हटाए गए नामों में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी 40% |
| कुल प्रभावित लोग | लगभग 90 लाख लोग |
| वोटिंग तारीख | 23 और 29 अप्रैल 2026 |
नेताओं और कोर्ट ने इस मामले पर क्या कहा?
Election Commission का कहना है कि यह केवल लिस्ट को साफ करने का तरीका था ताकि फर्जी और मृत लोगों के नाम हटाए जा सकें। वहीं मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने आरोप लगाया है कि बीजेपी के कहने पर मुस्लिम बहुल इलाकों को टारगेट किया गया है और इसे उन्होंने ‘वोट चोरी’ करार दिया। दूसरी तरफ BJP का कहना है कि जो लोग पात्र नहीं हैं, उनके नाम हटना जरूरी था। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने 6 अप्रैल को 20 लाख वोटरों के नाम हटाने की अनुमति दी थी, हालांकि कोर्ट अब सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी करने पर विचार कर सकता है।