पाकिस्तान के रावलपिंडी और इस्लामाबाद में आटे की भारी किल्लत होने की आशंका जताई जा रही है। Punjab Food Department (PFD) ने 11 जुलाई 2026 को अचानक रावलपिंडी डिवीजन की फ्लोर मिलों के गेहूं खरीद परमिट रद्द कर दिए हैं। इस फैसले के बाद मिल मालिकों ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है और मांग की है कि परमिट तुरंत बहाल किए जाएं।
मिल मालिकों का सरकार पर आरोप
Pakistan Flour Mills Association (PFMA) का कहना है कि यह कार्रवाई मिल मालिकों के विरोध प्रदर्शन के बदले में की गई है। मिल मालिकों ने आरोप लगाया कि 9 जुलाई 2026 के आसपास उनके खिलाफ जबरन मुकदमे और FIR दर्ज की गई थी। परमिट रद्द होने के कारण अब रावलपिंडी की मिलें दूसरे जिलों से गेहूं नहीं खरीद पा रही हैं, जिससे जुड़वा शहरों में सप्लाई बंद होने का खतरा पैदा हो गया है।
क्या है सरकार का रुख
पंजाब के मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता जनता को सस्ता आटा उपलब्ध कराना है। वहीं, कृषि सचिव ने दावा किया कि प्रांत ने 21.9 मिलियन टन का गेहूं उत्पादन लक्ष्य पूरा कर लिया है। हालांकि, इस मामले पर खाद्य निदेशालय के किसी भी अधिकारी ने कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। दूसरी ओर, खैबर पख्तूनख्वा के वित्त सलाहकार मुजम्मिल असलम ने पंजाब की नीतियों की आलोचना की है और कहा कि पंजाब से गेहूं और आटे की आवाजाही पर लगी अघोषित रोक के कारण कीमतों में उछाल आया है।
