रोटी महंगी, छह साल बाद गेहूं के आयात की नौबत, रिकॉर्ड पैदावार के बावजूद कीमतें ऊंची

नई दिल्ली। इस सत्र में रिकॉर्ड पैदावार के बावजूद गेहूं की कीमतें बढ़ रही हैं। कुछ राज्यों में कम उत्पादन इसकी मुख्य वजह है। केंद्र सरकार के खरीद लक्ष्य को पूरा करने में दिक्कत हो सकती है। माना जा रहा है कि गेहूं के आयात पर लगा प्रतिबंध हटाया जा सकता है या कीमतें और भी ज्यादा बढ़ सकती हैं।

रिकॉर्ड पैदावार की उम्मीद

फरवरी में कृषि मंत्रालय ने कहा था कि उन्हें 2024 में 11.2 करोड़ टन फसल की उम्मीद है, जो एक रिकॉर्ड होगा। पिछले साल बेमौसम बारिश ने उत्पादन को प्रभावित किया था, जिससे भंडारण में कमी आई थी। इस साल मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में पैदावार कम हुई है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के डेटा के अनुसार थोक गेहूं की कीमतें 5.3% और उपभोक्ता कीमतें 6.5% (27 मई तक) बढ़ गई हैं।

सरकारी एजेंसियों की खरीद

सरकारी एजेंसियां किसानों से गेहूं तीन उद्देश्यों के लिए खरीदती हैं: खाद्यान्न योजना के तहत आपूर्ति, भविष्य के लिए भंडारण, और बाजार में हस्तक्षेप। 24 मई तक 26 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया, जो पिछले साल की तुलना में ज्यादा है, लेकिन 30-32 मीट्रिक टन के लक्ष्य से कम है।

मध्य प्रदेश में गिरावट

खरीद का डेटा

वर्ष उत्पादन (मिलियन टन) उत्पादन वृद्धि (%)
2018-19 103 2.6
2019-20 106 1.4
2020-21 109 3.7
2021-22 112 4.1
2022-23 115 1.6
2023-24* 115 1.6

आयात की जरूरत

केंद्र सरकार ने 2022 से गेहूं के आयात पर प्रतिबंध लगा रखा है। अमेरिकी कृषि विभाग का कहना है कि घरेलू मांग, सरकारी भंडारण में गिरावट और कमजोर वैश्विक कीमतों के चलते भारत को दो मीट्रिक टन गेहूं आयात करना पड़ सकता है।

बाजार मूल्य और एमएसपी

किसानों को सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,275 प्रति क्विंटल मिलता है। मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्य प्रति क्विंटल बोनस दे रहे हैं, जिससे किसान अपनी फसल रोके हुए हैं।

आगे और महंगाई की संभावना

सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि गेहूं की खुदरा महंगाई 6.5 प्रतिशत है। अप्रैल में 8.7 प्रतिशत की समग्र खाद्य महंगाई की तुलना में गेहूं की कीमतों में मामूली वृद्धि हुई है। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में आपूर्ति कम होने से कीमतें और भी बढ़ सकती हैं।