अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. व्हाइट हाउस ने आधिकारिक तौर पर उन खबरों को खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया गया था कि वाशिंगटन ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई कड़ी धमकियों के बाद पूरी दुनिया में डर का माहौल बना हुआ है और इसी बीच अमेरिका को यह सफाई देनी पड़ी है.
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आखिर व्हाइट हाउस को क्यों देनी पड़ी परमाणु हमले पर सफाई?
व्हाइट हाउस ने 7 अप्रैल 2026 को साफ कहा कि वह ईरान पर परमाणु हमले पर विचार नहीं कर रहा है. दरअसल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने मंगलवार 7 अप्रैल की रात 8 बजे तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) नहीं खोला, तो एक पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है. ट्रंप ने ईरान के पुलों और बिजली घरों को तबाह करने की भी धमकी दी थी जिसके बाद दुनिया भर में परमाणु युद्ध की चर्चा शुरू हो गई थी.
ईरान और अमेरिका के बीच अभी क्या चल रहा है?
इस तनाव के बीच जमीनी हालात काफी खराब हो चुके हैं और कई जगहों पर हमले की खबरें आई हैं. स्थिति को समझने के लिए इन मुख्य बातों पर ध्यान दें:
- ईरान के दो पुलों और एक ट्रेन स्टेशन पर हवाई हमले होने की रिपोर्ट मिली है.
- अमेरिकी सेना ने ईरान के खार्ग द्वीप पर मौजूद सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है.
- ईरान ने फिलहाल 45 दिनों के अस्थायी युद्धविराम के प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया है.
- ईरान की मांग है कि संघर्ष को पूरी तरह और हमेशा के लिए खत्म किया जाना चाहिए.
- पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की इस समय दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं.
खाड़ी देशों और प्रवासियों पर इसका क्या असर होगा?
ईरान और अमेरिका का यह विवाद खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए चिंता का विषय है. अगर यह तनाव बढ़ता है तो तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है और हवाई उड़ानों पर भी असर पड़ सकता है. संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चेतावनी दी है कि आम जनता से जुड़ी जगहों को निशाना बनाना कानून के खिलाफ है. फिलहाल पर्दे के पीछे बातचीत जारी है जिसमें अमेरिका तेल से जुड़े कुछ प्रतिबंधों को हटाने पर विचार कर सकता है ताकि बातचीत आगे बढ़ सके.
