अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए व्हाइट हाउस ने पाकिस्तान का सहारा लिया है। एक नई रिपोर्ट में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान खुद शांतिदूत बनने के लिए आगे नहीं आया था, बल्कि अमेरिका ने उसे ईरान के साथ अस्थायी युद्ध विराम के लिए बातचीत करने के लिए कहा था। इस कदम का मुख्य उद्देश्य खाड़ी क्षेत्र में तनाव को कम करना और दोनों देशों के बीच सीधी भिड़ंत को टालना था।

👉: ईरान ने दिया 10 पॉइंट का शांति प्लान, अमेरिका ने किया रिजेक्ट, बोले- ये हमारे समझौते से अलग है

रिपोर्ट में क्या हुआ बड़ा खुलासा?

फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच रिश्तों को संभालने के लिए बिचौलिए की भूमिका निभाई। पाकिस्तान ने दुनिया के सामने खुद को एक ऐसे देश के रूप में पेश किया जो शांति चाहता है, लेकिन हकीकत में व्हाइट हाउस ने पाकिस्तान पर इसके लिए दबाव डाला था। इस योजना के तहत पाकिस्तान को ईरान के साथ संपर्क साधने और उन्हें एक अस्थायी समझौते के लिए राजी करने का काम सौंपा गया था।

इस समझौते के पीछे की मुख्य बातें क्या हैं?

पाकिस्तान के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच हुई इस बातचीत का मकसद दोनों देशों के बीच चल रहे टकराव को कुछ समय के लिए रोकना था। रिपोर्ट के आधार पर कुछ महत्वपूर्ण जानकारी नीचे दी गई है:

  • व्हाइट हाउस ने पाकिस्तान को ईरान के साथ बातचीत करने के लिए प्रेरित किया।
  • पाकिस्तान ने इस पूरी प्रक्रिया में एक मध्यस्थ के तौर पर काम किया।
  • इसका मुख्य लक्ष्य अमेरिका और ईरान के बीच एक अस्थायी युद्ध विराम को सफल बनाना था।
  • पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे अपनी कूटनीतिक जीत की तरह पेश करने की कोशिश की।
  • यह पूरी जानकारी फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के माध्यम से सार्वजनिक हुई है।