दोहा में श्रम मंत्रालय ने आज अपनी ऑक्युपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ डिपार्टमेंट के माध्यम से और अल अली इंजीनियरिंग, कॉन्ट्रैक्टिंग और ट्रेडिंग कंपनी के सहयोग से कंपनी के कार्यस्थलों पर एक जागरूकता कार्यशाला आयोजित की। इस कार्यशाला का उद्देश्य मजदूरों को गर्मी से होने वाले तनाव (हीट स्ट्रेस) के खतरों के बारे में शिक्षित करना और स्वास्थ्य पर इसके दुष्प्रभावों से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी देना था।

यह कार्यक्रम श्रम मंत्रालय की ongoing (चालू) पहल का हिस्सा है, जिसका मकसद सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के साथ मिलकर काम की जगहों पर सुरक्षा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना और गर्मी से संबंधित घटनाओं को कम करना है। यह पहल उन क्षेत्रों को खासतौर पर लक्षित करती है जहां कर्मचारी गर्मी के महीनों में बाहरी वातावरण में काम करते हैं।

मंत्रालय के विशेषज्ञों ने आसान भाषा में समझाया कि हीट स्ट्रेस से कैसे बचा जा सकता है। इसमें बताया गया कि बिना प्यास लगे भी बार-बार पानी पीना, दोपहर की तीव्र गर्मी के समय भारी शारीरिक श्रम से बचना, सांस लेने योग्य हल्के कपड़े पहनना, सिर को ढक कर रखना, और छांव या वातानुकूलित स्थानों में नियमित रूप से आराम करें।

कार्यशाला में हीट स्ट्रेस के प्रारंभिक लक्षणों जैसे अत्यधिक पसीना आना, सिरदर्द, चक्कर आना, तेज़ दिल की धड़कन, मितली और थकावट के बारे में भी बताया गया। अगर ये लक्षण दिखें तो तुरंत क्या करें, इस पर भी जोर दिया गया जैसे कि छांव में जाना, शरीर को ठंडा करना, आराम करना और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना।

ग्रीष्मकालीन अभियानों की श्रृंखला के तहत, मंत्रालय का उद्देश्य बाहरी कार्यस्थलों में सुरक्षा की संस्कृति को मजबूत करना है, सीधे सूर्य संपर्क के जोखिमों पर जागरूकता बढ़ाना और बचाव की आदतों को प्रोत्साहित करना है।

साथ ही मंत्रालय ने नियोक्ताओं से अपील की कि वे सभी कर्मचारियों के लिए मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करें, खासकर अत्यधिक गर्मी के मौसम में।

Vandana Upadhyay

4 वर्ष तक देश के बड़े अखबारी प्रकाशनो में काम करने के उपरांत मैं अब GulfHindi में अपनी सेवा दे रही हूँ। उम्मीद हैं मेरी लेखनी आप सब को खबरों से सही और सटीक रूबरू कराएगी.