मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के बीच वर्ल्ड बैंक ने एक बेहद गंभीर चेतावनी जारी की है। वर्ल्ड बैंक के अनुसार इस तनाव का सीधा असर खाड़ी देशों, उत्तर अफ्रीका, अफगानिस्तान और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला है। बैंक ने बुधवार 8 अप्रैल 2026 को अपनी ताज़ा रिपोर्ट में बताया है कि युद्ध की वजह से इन क्षेत्रों में आर्थिक विकास की रफ़्तार काफी धीमी हो जाएगी। यह सुस्ती वहां रहने वाले लोगों और वहां काम करने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों की आर्थिक स्थिति पर असर डाल सकती है।
इन देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा सबसे बुरा असर
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में बताया गया है कि खाड़ी सहयोग परिषद यानी GCC के देशों में आर्थिक सुस्ती सबसे ज़्यादा देखी जाएगी। कुवैत और कतर जैसे देशों को अपनी जीडीपी में बड़ी गिरावट का सामना करना पड़ सकता है। इसका सीधा असर वहां चल रहे प्रोजेक्ट्स और नई नौकरियों पर पड़ सकता है। जो भारतीय खाड़ी देशों में रहते हैं या वहां जाने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए बाज़ार में बढ़ती अनिश्चितता चिंता का विषय बन सकती है।
| देश या क्षेत्र | 2026 के लिए नया ग्रोथ अनुमान |
|---|---|
| MENAAP क्षेत्र (कुल) | 1.8 प्रतिशत |
| GCC देश (औसत) | 1.3 प्रतिशत |
| कुवैत | -6.4 प्रतिशत गिरावट |
| कतर | -5.7 प्रतिशत गिरावट |
आखिर क्यों आ रही है खाड़ी देशों में आर्थिक मंदी
वर्ल्ड बैंक के उपाध्यक्ष उस्मान डियोन ने साफ किया है कि किसी भी देश के विकास के लिए शांति और स्थिरता सबसे पहली शर्त है। अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने तेल के बाज़ार और सप्लाई चेन को काफी प्रभावित किया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की वजह से व्यापार में काफी रुकावट आई है जिससे बाज़ार में हलचल मची हुई है। आईएमएफ की चीफ ने भी संकेत दिए हैं कि इस तनाव की वजह से आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है और दुनिया भर में विकास की रफ़्तार कम होगी।