दुनिया भर में माताओं और शिशुओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए World Breastfeeding Week 2026 की शुरुआत हो गई है। यह आयोजन 1 अगस्त से 7 अगस्त तक 170 से अधिक देशों में मनाया जा रहा है। इस साल का मुख्य विषय Prioritize Breastfeeding: Create Sustainable Support Systems रखा गया है, जिसका उद्देश्य माताओं को स्तनपान के लिए जरूरी समर्थन और सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
भारत में स्तनपान को बढ़ावा
भारत में Ministry of Women and Child Development ने इस सप्ताह के दौरान पूरे देश में जागरूकता अभियान चलाने की घोषणा की है। इस मुहिम का मकसद परिवारों और स्वास्थ्य कर्मियों को स्तनपान के महत्व के बारे में जानकारी देना है। न्यू दिल्ली में Nutribray जैसी संस्थाएं भी इस वैश्विक पहल के साथ मिलकर माताओं को पोषण और स्तनपान के प्रति जागरूक कर रही हैं।
स्वास्थ्य और कामकाजी माताओं के लिए दिशा-निर्देश
World Health Organization (WHO) और UNICEF के अनुसार, स्तनपान शिशु के लिए किसी पहले टीके की तरह काम करता है, जो उन्हें निमोनिया और डायरिया जैसी बीमारियों से बचाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि बच्चे के जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराना बेहद जरूरी है, जिसे ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है। बच्चे को पहले छह महीने तक सिर्फ मां का दूध पिलाना चाहिए और इसके बाद दो साल या उससे अधिक समय तक अन्य पौष्टिक आहार के साथ स्तनपान जारी रखना चाहिए। कामकाजी माताओं के लिए सरकार और नियोक्ताओं से पेड मेटरनिटी लीव, दफ्तर में स्तनपान के लिए अलग जगह और बीच-बीच में ब्रेक देने जैसी सुविधाओं की अपील की गई है ताकि वे बिना किसी तनाव के अपने बच्चे को बेहतर पोषण दे सकें।
