विश्व मानवतावादी दिवस पर ऑक्सफैम प्रमुख का बड़ा बयान, कहा सहायता और राहत कार्यों को किया जा रहा है कमजोर

Sushma Kumari19 August 20263 min read40 viewsWorld
विश्व मानवतावादी दिवस पर ऑक्सफैम प्रमुख का बड़ा बयान, कहा सहायता और राहत कार्यों को किया जा रहा है कमजोर

विश्व मानवतावादी दिवस यानी 19 अगस्त 2026 के मौके पर Oxfam International के कार्यकारी निदेशक Amitabh Behar ने एक तीखा लेख प्रकाशित किया। इस लेख में उन्होंने खुलकर बात रखी कि आज के समय में मानवतावादी काम खत्म नहीं हो रहे हैं, बल्कि उन्हें जानबूझकर सौदेबाजी का शिकार बनाया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि बिना किसी जवाबदेही के केवल याद करना केवल अन्याय को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही उन्होंने पूरी दुनिया के लोगों से अपील की कि वे राहत कर्मियों की सुरक्षा के लिए आगे आएं और #protectaidworkers का समर्थन करें। उन्होंने यह भी बताया कि संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव का चुनाव यह तय करेगा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन पर दोषियों को सजा दिलाने में सामूहिक जिम्मेदारी कितनी निभाई जाती है।

नाइरोबी में जारी हुआ संयुक्त बयान और राहत कर्मियों की सुरक्षा पर मंडराता खतरा

यह बयान ऐसे समय में सामने आया जब केन्या की राजधानी नाइरोबी में World Vision International, संयुक्त राष्ट्र के राहत कार्यालय OCHA और IAWG ने मिलकर एक संयुक्त बयान जारी किया। इस बयान में बढ़ते हुए हिंसा के माहौल के बीच राहत और बचाव कार्यों से जुड़े लोगों की सुरक्षा की कड़ी मांग की गई। संयुक्त राष्ट्र के OCHA विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले तीन सालों से लगातार Gaza राहत कर्मियों के लिए दुनिया की सबसे खतरनाक जगह बना हुआ है, जहां अकेले 186 लोगों की जान जा चुकी है। दुनिया भर के आंकड़े डराने वाले हैं क्योंकि पिछले तीन वर्षों में 1,000 से ज्यादा सहायता कर्मियों की जान जा चुकी है, जिनमें साल 2025 के दौरान 350 लोग और साल 2026 में अब तक कम से कम 82 लोग शामिल हैं। इस पूरी स्थिति की अधिक जानकारी आप ReliefWeb Report पर जाकर देख सकते हैं।

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ऑक्सफैम के अनुभव और सुरक्षा को लेकर आने वाली मुश्किलें

ऑक्सफैम संगठन के मुखिया ने बताया कि पिछले आठ वर्षों में उनके संगठन ने अपने 5 साथियों और सहयोगियों को खो दिया है। इस दौरान उन्हें कुल 1,300 से ज्यादा सुरक्षा संबंधी घटनाओं का सामना करना पड़ा है। इजरायली प्रशासन ने इस संगठन को इस बात पर बैन कर दिया था क्योंकि उन्होंने अपने कर्मचारियों की निजी जानकारियां देने से मना कर दिया था। पिछले साल दिसंबर के महीने में 36 अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी इस तरह की मांग को ठुकरा दिया था। इन तमाम घटनाओं के बीच 31 मार्च 2025 का वह दिन भी शामिल है जब राफा में रेड क्रिसेंट के 8 इमरजेंसी सेवा कर्मियों की हत्या कर दी गई थी। इन हालात को देखते हुए संगठन ने मांग की है कि ऐसे मामलों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

जी-7 देशों द्वारा सहायता फंड में कटौती और अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी

आगे बात करते हुए अमिताभ बेहर ने दुनिया के बड़े और ताकतवर देशों यानी G7 nations पर भी कड़ा निशाना साधा। उन्होंने बताया कि साल 2026 के दौरान इन देशों ने साल 2024 की तुलना में इतिहास की सबसे बड़ी सहायता राशि में कटौती की है। एक तरफ जहां लोगों को मदद की सबसे ज्यादा जरूरत है, वहीं दूसरी तरफ मदद के पैसे कम किए जा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवतावादी कानूनों का पूरी सख्ती से पालन होना चाहिए। इन कानूनों के तहत किसी भी जगह पर भुखमरी को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने पर रोक है और स्कूलों तथा अस्पतालों की सुरक्षा करना अनिवार्य है। इसके साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव UNSC Resolution 2730 के तहत स्वतंत्र जांच और कानूनी कार्रवाई की बात दोहराई।

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