दुनिया भर में हथियारों की होड़ इस कदर बढ़ गई है कि अब यह आंकड़ा 2.9 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। पिछले 11 सालों से सैन्य खर्च लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका, चीन और रूस जैसे बड़े देश सबसे ज्यादा पैसा खर्च कर रहे हैं, जबकि Gulf देशों में भी सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए भारी निवेश किया जा रहा है।

दुनिया भर में सैन्य खर्च और बड़े देशों का हाल क्या है?

Stockholm International Peace Research Institute (SIPRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के तीन सबसे बड़े देश अमेरिका, चीन और रूस मिलकर कुल खर्च का आधा हिस्सा खर्च कर रहे हैं। अमेरिका का खर्च 954 बिलियन डॉलर रहा, जबकि चीन ने 336 बिलियन डॉलर और रूस ने 190 बिलियन डॉलर खर्च किए। यूरोप में भी रक्षा बजट में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिसमें जर्मनी और स्पेन जैसे देशों ने अपने बजट में काफी इजाफा किया है। यूक्रेन का सैन्य खर्च उसके कुल GDP का 40 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

Gulf देशों और Middle East में हथियारों की क्या स्थिति है?

Middle East में कुल सैन्य खर्च 0.1 प्रतिशत बढ़कर 218 बिलियन डॉलर हो गया है। इस बीच अमेरिका ने Gulf देशों के लिए हथियारों की बिक्री के नियमों में ढील दी है। US Secretary of State Marco Rubio ने इमरजेंसी का हवाला देते हुए Congressional review की जरूरत को खत्म किया, जिससे Kuwait और UAE को तेजी से सैन्य उपकरण मिल सकें। Kuwait ने 8 बिलियन डॉलर की लागत से 8 LTAMDS रडार खरीदने की मंजूरी पाई है। वहीं, UAE के लिए 8.5 बिलियन डॉलर के सौदों को मंजूरी मिली है, जिसमें LRDR रडार और F-16 मिसाइलें शामिल हैं।

सैन्य खर्च और सौदों का मुख्य विवरण नीचे दी गई टेबल में है:

देश/क्षेत्र खर्च या सौदे की राशि मुख्य जानकारी
United States 954 बिलियन डॉलर दुनिया का सबसे बड़ा खर्च करने वाला देश
China 336 बिलियन डॉलर दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा खर्च
Russia 190 बिलियन डॉलर तीसरे नंबर पर सैन्य खर्च
Europe 864 बिलियन डॉलर क्षेत्रीय खर्च में 14% की वृद्धि
Kuwait 8 बिलियन डॉलर LTAMDS रडार की खरीद
UAE 8.5 बिलियन डॉलर LRDR रडार और मिसाइल सौदे
Israel 48.3 बिलियन डॉलर गज़ा सीजफायर के बाद बजट में 4.9% की कमी
Iran 7.4 बिलियन डॉलर आर्थिक दबाव के कारण खर्च 5.6% गिरा

Strait of Hormuz और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?

Kuwait के Ambassador Meshal Mustafa J Al-Shemali ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा है कि अगर Strait of Hormuz के रास्ते में कोई भी रुकावट आती है, तो इससे पूरी दुनिया में आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने जोर दिया कि सभी देशों को UNCLOS नियमों का पालन करना चाहिए क्योंकि यह रास्ता वैश्विक ऊर्जा और व्यापार के लिए बहुत जरूरी है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com