बैंक ग्राहकों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। अब अगर आपके बैंक खाते से आपकी जानकारी या गलती के बिना पैसे निकल जाते हैं, तो आपको अपनी जमा पूंजी के लिए बैंकों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत यह स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि सुरक्षा में चूक बैंक की तरफ से हुई है या सिस्टम की खामी के कारण पैसा निकला है, तो बैंक को निर्धारित समय सीमा के भीतर ग्राहक को पैसा लौटाना होगा। यह फैसला उन लाखों लोगों के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगा जो डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं लेकिन ऑनलाइन धोखाधड़ी के डर से सहमे रहते हैं।

बिना ग्राहक की गलती के पैसे कटने पर बैंक को 10 दिनों के भीतर करनी होगी पूरी भरपाई और जवाबदेही

डिजिटल लेन-देन के इस दौर में अक्सर देखने में आता है कि साइबर ठगी होने पर बैंक अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। नए निर्देशों के मुताबिक, अगर किसी ग्राहक के खाते से पैसे निकलते हैं और इसमें ग्राहक की कोई भूमिका नहीं है, तो बैंक को 10 दिनों के भीतर वह रकम वापस करनी होगी। यदि बैंक समय पर ओटीपी (OTP) या सुरक्षा सत्यापन सुनिश्चित नहीं कर पाता है, तो इसे बैंक की सेवा में कमी माना जाएगा। इस स्थिति में नुकसान की भरपाई करने की पूरी कानूनी जिम्मेदारी बैंक की होगी।

ओटीपी साझा नहीं करने के बावजूद अगर खाते से निकली राशि तो बैंक की सुरक्षा प्रणाली मानी जाएगी दोषी

अक्सर बैंक यह दलील देते हैं कि ग्राहक ने अपना पासवर्ड या ओटीपी किसी के साथ साझा किया होगा, जिससे ठगी हुई। लेकिन, ताजा मामले में यह साफ हो गया है कि अगर ग्राहक ने अपना ओटीपी किसी को नहीं बताया है और फिर भी ट्रांजैक्शन हो गया, तो यह बैंक के सिस्टम की विफलता है। जांच में अगर यह पाया जाता है कि बैंक की सुरक्षा प्रणाली में खामी थी, जिसके चलते जालसाजों ने सेंधमारी की, तो ग्राहक को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। ऐसे मामलों में बैंक की लापरवाही तय मानी जाएगी और उसे हर्जाना भुगतना पड़ेगा।

सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करना और संदिग्ध लेनदेन पर तुरंत अलर्ट भेजना अब बैंकों की सर्वोच्च प्राथमिकता

इस फैसले के बाद बैंकों को अपनी डिजिटल सुरक्षा को लेकर और अधिक सतर्क रहने की हिदायत दी गई है। यह बैंक की जिम्मेदारी है कि वह ओटीपी आधारित सत्यापन को सख्ती से लागू करे। साथ ही, अगर किसी खाते में कोई संदिग्ध लेनदेन (Suspicious Transaction) होता है, तो बैंक को तुरंत ग्राहक को अलर्ट भेजना चाहिए और शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सख्त रुख के बाद बैंक अपनी तकनीक को अपग्रेड करेंगे, जिससे ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी।

लाखों बैंक ग्राहकों के लिए जगी उम्मीद, अब अपने पैसे वापस पाने का मिल गया है मजबूत कानूनी अधिकार

यह कदम डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था में ग्राहकों का भरोसा बढ़ाने वाला साबित होगा। अब आम जनता यह जानकर निश्चिंत हो सकती है कि अगर उन्होंने कोई गलती नहीं की है, तो उनका पैसा सुरक्षित है। यह फैसला उन तमाम पीड़ितों के लिए भी एक नजीर बनेगा जो बिना किसी गलती के अपनी मेहनत की कमाई गंवा चुके हैं। अब यह स्पष्ट है कि सुरक्षा में चूक होने पर बैंक बहानेबाजी नहीं कर सकते, उन्हें ग्राहक का एक-एक पैसा लौटाना ही होगा।

GulfHindi Desk

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