Yemen Attack: यमन के Al-Makha पोर्ट पर भयानक ड्रोन और मिसाइल हमला, 7 लोगों की मौत और 35 घायल.

Aanya9 August 20262 min read89 viewsYemen
Yemen Attack: यमन के Al-Makha पोर्ट पर भयानक ड्रोन और मिसाइल हमला, 7 लोगों की मौत और 35 घायल.

यमन के लाल सागर के पास स्थित महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर Al-Makha और उसके आस-पास के रिहायशी इलाकों में हूती विद्रोहियों ने बड़ा हमला कर दिया। रविवार, 9 अगस्त 2026 को हुए इस भयानक बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले में कुल 7 लोगों की मौत हो गई और लगभग 35 लोग बुरी तरह घायल हो गए। इस अचानक हुए हमले से पूरे इलाके में कई जोरदार धमाके हुए, जिससे आम लोगों में भारी डर का माहौल बन गया है।

हूती विद्रोहियों ने ली हमले की जिम्मेदारी

हूती विद्रोहियों ने इस सुनियोजित हमले की जिम्मेदारी खुद ली है। उनका कहना है कि उन्होंने सऊदी सैनिकों और हथियारों के गोदामों को निशाना बनाने के लिए यह बड़ा और सटीक सैन्य ऑपरेशन किया है। इस हमले में 20 से ज्यादा ड्रोन इस्तेमाल किए गए, जिन्होंने बंदरगाह के अंदर नागरिक इलाकों को सीधे तौर पर निशाना बनाया। हमले की वजह से इमारतों, बंदरगाह के घाट, कमर्शियल सामान और जरूरी खाने-पीने की चीजों को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा एक ट्रेनिंग सेंटर पर भी हमला हुआ।

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सरकारी अधिकारियों ने दी जानकारी

यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के नियंत्रण वाले Al-Makha पोर्ट के निदेशक ने इस बात की पुष्टि की है कि कई मिसाइलें सीधे बंदरगाह के अंदर आम नागरिकों की जगहों पर गिरीं। यमन के उप सूचना मंत्री Fayyad Alnoman ने बताया कि यमन सरकार की एयर डिफेंस सिस्टम ने बंदरगाह और पास के एक एयरपोर्ट के ऊपर कई ड्रोन्स को हवा में ही रोक दिया था, फिर भी भारी तबाही को नहीं रोका जा सका। घायलों को तुरंत पास के अस्पतालों में पहुंचाया गया है जहां उनका इलाज चल रहा है।

समुद्री मार्ग और क्षेत्रीय तनाव पर असर

महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग Bab al-Mandeb Strait के पास स्थित Al-Makha पर यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अप्रैल 2022 के बाद से इस इलाके में कुछ शांति बनी हुई थी। इस हमले ने एक बार फिर से क्षेत्रीय तनाव को बढ़ा दिया है। हाल ही में सऊदी अरब और कुवैत ने 7 अगस्त 2026 को जारी किए गए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) के उस बयान का स्वागत किया था जिसमें जुलाई से हूती मिसाइल हमलों की निंदा की गई थी। इसके बाद से सऊदी अरब ने अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा करने के अपने अधिकार को फिर से दोहराया है।

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