यमन के Ansarullah (Houthi) आंदोलन ने ईरान के समर्थन में युद्ध के मैदान में उतरने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। ईरान की Tasnim News एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, 26 मार्च 2026 को यह जानकारी दी गई कि हूती लड़ाके 28 फरवरी से ही हाई अलर्ट पर हैं। इस आंदोलन ने स्पष्ट किया है कि वे ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य संघर्ष में किसी भी समय सीधे तौर पर शामिल हो सकते हैं। इस फैसले से मध्य पूर्व में तनाव और अधिक बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।

हूती आंदोलन ने जंग को लेकर क्या तैयारी की है?

Ansarullah के राजनीतिक ब्यूरो ने हाल ही में ईरान द्वारा इजरायल पर किए गए मिसाइल हमलों को जायज ठहराया है। उन्होंने इसे एक बड़ी सजा बताया और कहा कि अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई का जवाब सिर्फ संघर्ष से ही संभव है। हूती नेता Abdul-Malik al-Houthi ने साफ कहा है कि उनके लड़ाकों के हाथ ट्रिगर पर हैं और वे सही समय पर कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं। मोहम्मद अल-बुखैती ने भी पुष्टी की है कि यमन का इस युद्ध में कूदना अब सिर्फ कुछ समय की बात है।

इस तनाव का समुद्री रास्तों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?

हूती प्रशासन ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रहती है, तो इसका असर वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा की कीमतों पर पड़ेगा। समुद्री रास्तों पर तनाव बढ़ने से कच्चे तेल के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। मुख्य घटनाक्रम नीचे दिए गए हैं:

तारीख बयान या प्रमुख घटना
28 फरवरी 2026 हूती आंदोलन के लड़ाके पूरी तरह अलर्ट मोड पर आए
6 मार्च 2026 Abdul-Malik al-Houthi ने ईरान के साथ एकजुटता जाहिर की
14 मार्च 2026 मोहम्मद अल-बुखैती ने कहा कि निर्णय लिया जा चुका है
26 मार्च 2026 युद्ध में शामिल होने के लिए तैयार होने की आधिकारिक रिपोर्ट आई

हूती आंदोलन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण Bab al-Mandeb जलडमरूमध्य पर अपने नियंत्रण का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर सकता है। वहीं दूसरी ओर, ईरान ने Strait of Hormuz में नई टोल व्यवस्था लागू करने के संकेत दिए हैं। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए यह स्थिति चिंताजनक हो सकती है क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय यात्रा और सामानों की ढुलाई पर असर पड़ने की संभावना है।