यमन के अंसारुल्लाह ने किया ईरान का समर्थन, अमेरिका और इसराइल के खिलाफ जंग के लिए रहने को कहा तैयार.

मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव के बीच यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन ने ईरान के साथ अपनी पूरी सैन्य एकजुटता दिखाने का बड़ा ऐलान किया है। 25 अगस्त 2026 को अंसारुल्लाह के नेता सय्यद अब्दुल-मालक अल-हूथी ने एक औपचारिक घोषणा की और साफ किया कि उनका संगठन ईरान के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है। उन्होंने मौजूदा हालात को अमेरिका और इसराइल की एक सोची-समझी साजिश बताया है, जिसके तहत ईरान, लेबनान और यमन पर लगातार सैन्य दबाव बनाया जा रहा है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए आप ANI News की रिपोर्ट देख सकते हैं।
ईरान की अर्थव्यवस्था पर अमेरिका का नया शिकंजा
यह पूरा घटनाक्रम तब और तेज हुआ जब अमेरिकी अधिकारियों की तरफ से ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने की कोशिशें शुरू हुईं। अमेरिकी वित्त मंत्री ने 24 अगस्त 2026 को ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट नाम से एक नए कार्यक्रम का ऐलान किया, जिसका मकसद ईरानी अर्थव्यवस्था को दुनिया से पूरी तरह अलग-थलग करना है। इस कदम के जवाब में ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री अली मदानिज़ादेह ने 25 अगस्त 2026 को इन अमेरिकी उपायों को एक आर्थिक आतंकवादी हमला बताया। उन्होंने कहा कि उनका देश इन नए प्रतिबंधों का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह से तैयार है और ईरान की जनता इस मुश्किल वक्त से पार पा लेगी।
ईरान की तरफ से कड़ी चेतावनी
ईरान के सैन्य अधिकारियों ने भी अमेरिका और उसके सहयोगियों को साफ शब्दों में चेतावनी दी है। ब्रिगेडियर जनरल होसैन मोहेब्बी ने 25 अगस्त 2026 को यह बयान दिया कि यदि ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया, तो देश अमेरिका के ऊर्जा हितों और महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर बहुत भारी प्रहार करेगा। ईरान किसी भी बाहरी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी ताकत के साथ तैयार बैठा है और अपनी सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।
क्षेत्रीय देशों के लिए पुराना संदेश
इससे पहले 26 मार्च 2026 को यमन की सर्वोच्च राजनीतिक परिषद के प्रमुख महमूद अल-माशात ने भी अरब देशों को आगाह किया था कि वे अमेरिका और इसराइल के उद्देश्यों का हिस्सा न बनें। उन्होंने कहा था कि यमन अपनी नैतिक और मानवीय जिम्मेदारी समझते हुए ईरान पर होने वाले किसी भी आक्रमण का जवाब देने के लिए सभी वैध तरीकों का इस्तेमाल करेगा। साल की शुरुआत में भी सय्यद अब्दुल-मालक अल-हूथी ने मुस्लिम और अरब देशों से अपील की थी कि वे इसराइल को अपना मुख्य दुश्मन मानें। अंसारुल्लाह के लड़ाके रणनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, जिसे क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान एक बड़े दबाव के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।